सुप्रीम कोर्ट ने अपने पहले दिए गए निर्णय को बरकरार रखते हुए स्पष्ट किया कि मामले में ऐसा कोई कानूनी आधार नहीं है, जिसके कारण पुराने फैसले में बदलाव किया जाए। इसके साथ ही सरकार की समीक्षा याचिका और खुली अदालत में सुनवाई की मांग भी अस्वीकार कर दी गई।
25 हजार से अधिक शिक्षकों को होगा सीधा लाभ
इस फैसले का सबसे बड़ा लाभ उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा विभाग में कार्यरत करीब 25 हजार अनुदेशक शिक्षकों को मिलेगा। अब उन्हें वर्ष 2017 से बढ़े हुए मानदेय का बकाया एरियर मिलने की उम्मीद है। लंबे समय से लंबित इस मामले के निपटारे के बाद शिक्षकों में खुशी का माहौल है।
17 हजार रुपये मानदेय का आदेश बरकरार
सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी 2026 में दिए गए अपने आदेश को सही ठहराते हुए कहा कि अनुदेशक शिक्षकों को 17 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया जाना चाहिए। साथ ही वर्ष 2017 से बढ़े हुए मानदेय के अनुसार बकाया राशि का भुगतान भी किया जाए। अब राज्य सरकार को इसी आदेश के अनुसार भुगतान प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
क्यों शुरू हुआ था यह विवाद?
वर्ष 2017 में तत्कालीन सरकार ने अनुदेशक शिक्षकों का मानदेय 8,470 रुपये से बढ़ाकर 17,000 रुपये प्रतिमाह करने का निर्णय लिया था। हालांकि बाद में यह फैसला पूरी तरह लागू नहीं हो सका। इसके बाद अनुदेशक शिक्षकों ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया और अपने अधिकार की मांग की।
अब आगे क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले के बाद अब उत्तर प्रदेश सरकार को बढ़े हुए मानदेय और वर्ष 2017 से लंबित एरियर के भुगतान की प्रक्रिया शुरू करनी होगी। इससे हजारों अनुदेशक शिक्षकों को आर्थिक राहत मिलेगी और लंबे समय से चल रहा विवाद समाप्त होने की उम्मीद है। यह फैसला प्रदेश के अनुदेशक शिक्षकों के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

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