जिलों की रिपोर्ट के आधार पर मिलेगा लाभ
सरकार ने सभी 38 जिलों के जिलाधिकारियों से वर्षा की स्थिति और खेती पर पड़े प्रभाव की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। इन रिपोर्टों के आधार पर प्रभावित क्षेत्रों की पहचान की जाएगी। जहां कम वर्षा के कारण खेती प्रभावित हुई है, वहां किसानों को डीजल अनुदान का लाभ दिया जाएगा। रिपोर्ट मिलते ही अनुदान वितरण की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी है।
खरीफ फसलों को बचाने पर फोकस
बिहार में खरीफ सीजन के दौरान सबसे अधिक क्षेत्र में धान की खेती होती है। पर्याप्त बारिश नहीं होने की वजह से किसानों को डीजल पंप के जरिए सिंचाई करनी पड़ रही है, जिससे खेती की लागत बढ़ जाती है। सरकार का मानना है कि डीजल अनुदान मिलने से किसानों को आर्थिक राहत मिलेगी और वे समय पर सिंचाई कर अपनी फसल को सुरक्षित रख सकेंगे।
12 घंटे बिजली आपूर्ति का निर्देश
डीजल अनुदान के साथ सरकार ने सिंचाई व्यवस्था मजबूत करने के लिए अधिकारियों को सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक यानी 12 घंटे कृषि फीडरों के माध्यम से बिजली उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। इससे जिन किसानों के पास विद्युत चालित पंप हैं, उन्हें भी सिंचाई में सुविधा मिलेगी और डीजल पर निर्भरता कम होगी।
खेती की लागत होगी कम
खेती में डीजल की कीमत बढ़ने से सिंचाई का खर्च लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में डीजल अनुदान किसानों के लिए सीधी आर्थिक सहायता साबित हो सकता है। इससे छोटे और सीमांत किसानों को सबसे अधिक लाभ मिलने की उम्मीद है, क्योंकि उनकी खेती का बड़ा हिस्सा सिंचाई पर निर्भर रहता है।
.png)
0 comments:
Post a Comment