बिहार सरकार का फैसला, गांव-गांव के लिए बड़ी खुशखबरी

पटना। बिहार सरकार ग्रामीण विकास और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई गति देने के लिए बिहार राज्य सहकारिता नीति-2026 लागू करने की तैयारी में है। राष्ट्रीय सहकारिता नीति-2025 की तर्ज पर तैयार की जा रही इस नई नीति का उद्देश्य गांवों में सहकारिता को मजबूत करना, रोजगार के अवसर बढ़ाना और किसानों, महिलाओं तथा युवाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है।

हर गांव बनेगा 'कोऑपरेटिव विलेज'

नई नीति का सबसे बड़ा लक्ष्य राज्य के प्रत्येक गांव को 'कोऑपरेटिव विलेज' के रूप में विकसित करना है। सरकार चाहती है कि हर पंचायत में कम से कम एक सहकारी इकाई सक्रिय हो, जिससे ग्रामीणों को खेती, स्वरोजगार, विपणन और वित्तीय सेवाओं का लाभ स्थानीय स्तर पर मिल सके। इसके साथ ही कुछ गांवों को आदर्श सहकारी गांव के रूप में भी विकसित करने की योजना बनाई गई है।

सहकारी समितियों का होगा विस्तार

वर्तमान में राज्य में हजारों सहकारी समितियां कार्यरत हैं। नई नीति के तहत इनकी संख्या में करीब 30 प्रतिशत तक बढ़ोतरी करने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार का मानना है कि अधिक लोगों को सहकारिता से जोड़ने से ग्रामीण क्षेत्रों में आय बढ़ेगी और आर्थिक गतिविधियों को नया विस्तार मिलेगा।

पैक्स का दायरा होगा और बड़ा

सरकार पैक्स और अन्य सहकारी संस्थाओं को केवल कृषि तक सीमित नहीं रखना चाहती। नई नीति के तहत इन्हें डेयरी, फूड प्रोसेसिंग, पेयजल पैकेजिंग, पर्यटन, हरित ऊर्जा, टैक्सी सेवा, बीमा और अन्य नए क्षेत्रों में भी काम करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इससे गांवों में स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।

महिलाओं और युवाओं पर फोकस

नई नीति में महिलाओं और युवाओं की भागीदारी बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया है। सहकारी समितियों में महिलाओं की सदस्यता बढ़ाने, उन्हें आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने और वंचित वर्गों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए विशेष अभियान चलाने की तैयारी है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक सशक्तिकरण को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।

स्थानीय उत्पादों को मिलेगा बड़ा बाजार

सरकार सहकारी समितियों के माध्यम से तैयार होने वाले उत्पादों की ब्रांडिंग, पैकेजिंग और मार्केटिंग को भी मजबूत करेगी। लक्ष्य यह है कि बिहार के स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाया जाए। इससे किसानों, कारीगरों और ग्रामीण उद्यमियों की आय बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

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