बच्चों के अभिभावकों को DBT से मिलेगी राशि
परिषदीय प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ने वाले करीब 10 लाख ऐसे विद्यार्थियों को जल्द आर्थिक सहायता देने की तैयारी है, जिन्हें अभी तक योजना का लाभ नहीं मिल पाया है। यह रकम DBT के जरिए सीधे अभिभावकों के बैंक खाते में भेजी जाएगी।
इस राशि का इस्तेमाल बच्चों के लिए स्कूल ड्रेस, जूते-मोजे और जरूरी शैक्षणिक सामग्री खरीदने में किया जा सकेगा। सरकार का उद्देश्य है कि आर्थिक मदद मिलने के बाद बच्चे निर्धारित यूनिफॉर्म में स्कूल पहुंचें। प्रदेश में पहले ही करीब 1.10 करोड़ विद्यार्थियों के अभिभावकों को DBT के माध्यम से सहायता दी जा चुकी है। अब नए दाखिले और बाकी पात्र विद्यार्थियों को योजना में शामिल किया जा रहा है।
3 लाख निजी स्कूल शिक्षकों को कैशलेस इलाज की तैयारी
सरकार निजी स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए भी बड़ी पहल कर रही है। करीब 35 हजार निजी स्कूलों में कार्यरत 3 लाख शिक्षकों और उनके आश्रितों को शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना का लाभ देने की तैयारी है। योजना लागू होने के बाद पात्र शिक्षक और उनके परिवार के आश्रित सदस्य सूचीबद्ध अस्पतालों में निर्धारित नियमों के तहत कैशलेस इलाज करा सकेंगे।
इसके लिए शिक्षकों का डाटा और जरूरी दस्तावेज जुटाने की प्रक्रिया पर काम किया जा रहा है। इन दोनों पहलों से एक तरफ स्कूली बच्चों के परिवारों को पढ़ाई से जुड़ी जरूरी सामग्री खरीदने में मदद मिलेगी, वहीं निजी स्कूल शिक्षकों और उनके परिवारों को स्वास्थ्य सुरक्षा का लाभ मिलने की उम्मीद है।
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