इस योजना के लिए सरकार ने 1,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इससे किसानों को फसल को सुरक्षित रखने के दौरान आने वाले खर्च का बोझ कम करने में मदद मिल सकती है।
बाजार भाव गिरने पर भी मिलेगी राहत
आलू की कीमतों में उतार-चढ़ाव किसानों के लिए बड़ी चुनौती रहता है। इसी समस्या को देखते हुए सरकार ने भाव स्थिरता के लिए भी व्यवस्था की है। भामाशाह भाव स्थिरता कोष के तहत पात्र किसानों को डेढ़ रुपये प्रति किलो की दर से भावांतर भुगतान दिए जाने का प्रावधान है। इसके लिए 100 करोड़ रुपये की राशि निर्धारित की गई है। इसका उद्देश्य बाजार में कीमत कम होने की स्थिति में किसानों को होने वाले नुकसान को कुछ हद तक कम करना है।
दूसरे राज्यों में तलाशे जा रहे नए बाजार
सरकार की कोशिश सिर्फ आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है। किसानों की उपज को दूसरे राज्यों के बाजारों तक पहुंचाने के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में जनवरी 2026 में भुवनेश्वर में खरीदार और विक्रेताओं के बीच सम्मेलन आयोजित किया गया था।
इस पहल के जरिए उत्तर प्रदेश के आलू के लिए ओडिशा समेत दूसरे राज्यों में नए बाजार तलाशने पर जोर दिया जा रहा है। अधिकारियों की टीम भी अलग-अलग राज्यों में जाकर संभावित खरीदारों और बाजारों की जानकारी जुटा रही है।
उत्पादन से बिक्री तक मदद का दावा
उद्यान विभाग का कहना है कि पिछले कई वर्षों से आलू किसानों की समस्याओं को कम करने के लिए लगातार कदम उठाए जा रहे हैं। सरकार का जोर भंडारण लागत कम करने, बाजार भाव में गिरावट के दौरान राहत देने और किसानों को नए बाजार उपलब्ध कराने पर है।
इन योजनाओं के लागू होने से किसानों को फसल कटाई के बाद होने वाले खर्च और बाजार की अनिश्चितता से कुछ राहत मिलने की उम्मीद है। सरकार का लक्ष्य किसानों की आय बढ़ाने के साथ उनकी उपज को बेहतर बाजार उपलब्ध कराना है।

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