सरकार और AAI के बीच होगा समझौता
दोनों प्रस्तावित एयरपोर्ट के लिए राज्य सरकार और भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण के बीच समझौता होने वाला है। राज्य सरकार ने समझौते के प्रारूप को मंजूरी दे दी है। इसके बाद AAI की टीम प्रस्तावित स्थलों का निरीक्षण करेगी और यह देखा जाएगा कि वहां एयरपोर्ट बनाना तकनीकी और व्यावहारिक रूप से कितना उपयुक्त है।
जमीन चयन की प्रक्रिया जारी
सिविल विमानन विभाग के अनुसार, दोनों एयरपोर्ट के लिए जमीन चिह्नित करने की प्रक्रिया चल रही है। जमीन तय होने के बाद संबंधित स्थलों की विस्तृत जानकारी विमानपत्तन प्राधिकरण को दी जाएगी। इसमें जमीन का नक्शा, खसरा संख्या, क्षेत्रफल, लंबाई-चौड़ाई और स्थल की भौगोलिक स्थिति जैसी जानकारियां शामिल होंगी।
इसके अलावा मौसम के पिछले दस वर्षों के आंकड़े, हवा की दिशा, जमीन की ऊंचाई और सर्वे ऑफ इंडिया के नक्शे का भी अध्ययन किया जाएगा। प्रस्तावित एयरपोर्ट से किन श्रेणी के विमानों का संचालन संभव होगा, इसका आकलन भी किया जाएगा।
रिपोर्ट के बाद आगे बढ़ेगा प्रोजेक्ट
सभी तकनीकी और भौगोलिक जानकारियों के आधार पर भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण पूर्व संभाव्यता रिपोर्ट तैयार करेगा। समझौते के अनुसार चालू वित्त वर्ष में दोनों प्रस्तावित स्थलों का अध्ययन बिना शुल्क किया जाएगा। अगर अध्ययन की रिपोर्ट अनुकूल आती है तो एयरपोर्ट निर्माण की अगली प्रक्रिया शुरू हो सकेगी।
राजगीर में एयरपोर्ट बनने से पर्यटन क्षेत्र को विशेष बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। वहीं, आसपास के जिलों में कारोबार, रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति मिल सकती है। दो नए एयरपोर्ट बनने से बिहार के इन क्षेत्रों के लोगों को लंबी दूरी की यात्रा के लिए दूसरे शहरों पर निर्भरता कम होने की उम्मीद है और राज्य की हवाई कनेक्टिविटी भी मजबूत होगी।

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