इस समझौते के तहत बकरीपालकों को वैज्ञानिक तरीके से पालन, पशु स्वास्थ्य, बेहतर प्रबंधन और प्रशिक्षण की सुविधा देने पर जोर रहेगा। इसका उद्देश्य बकरीपालकों की उत्पादकता बढ़ाने के साथ उनकी आमदनी में भी सुधार करना है।
बकरी के दूध को मिलेगा बाजार
सरकार बकरी के दूध को भी संगठित बाजार से जोड़ने की तैयारी कर रही है। इसके लिए अलग-अलग प्रखंडों में बकरीपालकों की सहकारी समितियां बनाई जा रही हैं। योजना के तहत मौजूदा दूध संग्रहण व्यवस्था के जरिए बकरी का दूध इकट्ठा करने और गुणवत्ता के अनुसार उसका प्रसंस्करण व पैकेजिंग करने पर काम होगा। आगे चलकर इसे सुधा ब्रांड के माध्यम से बाजार तक पहुंचाने की योजना है। इसके साथ बकरीपालकों के लिए अलग सहकारी संघ बनाने की दिशा में भी पहल की जा रही है।
गांव स्तर पर मिलेगा प्रशिक्षण
समझौते के बाद बकरीपालकों को गांव स्तर पर तकनीकी सहयोग देने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। पशुओं के टीकाकरण, रोग नियंत्रण, कृमिनाशक दवा, बेहतर पोषण, प्रजनन प्रबंधन और स्वच्छ तरीके से दूध उत्पादन जैसी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा। सरकार का लक्ष्य ऐसी व्यवस्था तैयार करना है, जिसमें बकरीपालकों को अपने उत्पा के लिए बाजार तलाशने की परेशानी न हो और वे उत्पादन व गुणवत्ता पर ध्यान देकर अपनी आय बढ़ा सकें।
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