प्रमोशन के नियम को लेकर क्या बदला?
निचले ग्रेड से उच्च ग्रेड में प्रमोशन के लिए अब तक न्यूनतम दो वर्ष की नियमित सेवा यानी रेजीडेंसी पीरियड की शर्त लागू रही है। समस्या यह थी कि इस दो साल की अवधि की गणना किस तारीख तक की जानी है, इसे लेकर कई स्तरों पर भ्रम की स्थिति बनी रहती थी।
कई बार प्रमोशन की प्रक्रिया शुरू होने की तारीख तक कर्मचारी के दो साल पूरे नहीं होते थे और इसी वजह से उसकी पात्रता पर सवाल उठ जाता था। अब रेलवे बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित सेवा अवधि को संबंधित वैकेंसी असेसमेंट पीरियड के भीतर पूरा किया जाना जरूरी होगा।
सिलेक्शन पोस्ट के लिए 15 महीने का चक्र
जिन पदों पर प्रमोशन चयन प्रक्रिया, लिखित परीक्षा या योग्यता के आधार पर होता है, उन्हें सिलेक्शन पोस्ट के रूप में माना जाता है। ऐसे मामलों में दो साल की आवश्यक सेवा अवधि को 15 महीने की वैकेंसी असेसमेंट अवधि के भीतर पूरा करना होगा। इससे उन कर्मचारियों को फायदा मिल सकता है, जिनकी दो साल की सेवा प्रमोशन प्रक्रिया शुरू होने की तारीख तक पूरी नहीं हुई थी, लेकिन निर्धारित मूल्यांकन अवधि के दौरान वे आवश्यक सेवा अवधि पूरी कर रहे हैं।
नॉन-सिलेक्शन पोस्ट में 12 महीने की अवधि
वहीं, जिन पदों पर प्रमोशन मुख्य रूप से वरिष्ठता और सेवा रिकॉर्ड के आधार पर होता है, उन्हें नॉन-सिलेक्शन पोस्ट कहा जाता है। ऐसे मामलों में दो साल की सेवा की शर्त को 12 महीने के वैकेंसी असेसमेंट चक्र के भीतर पूरा करना होगा। इस व्यवस्था से प्रमोशन की पात्रता तय करने में पहले से चली आ रही तारीखों को लेकर असमंजस की स्थिति कम होने की उम्मीद है।
लगातार की गई एडहॉक सेवा भी हो सकती है शामिल
रेलवे बोर्ड के स्पष्टीकरण में एडहॉक सेवा को लेकर भी महत्वपूर्ण बात सामने आई है। यदि किसी कर्मचारी ने नियमित नियुक्ति से ठीक पहले बिना किसी ब्रेक के एडहॉक आधार पर सेवा की है, तो निर्धारित शर्तों के अनुसार उस सेवा अवधि को भी न्यूनतम दो साल की सेवा की गणना में शामिल किया जा सकेगा। इस प्रावधान से उन कर्मचारियों को राहत मिल सकती है, जिनकी नियमित नियुक्ति से पहले लगातार एडहॉक सेवा रही है।
जूनियर पात्र हुआ तो सीनियर को भी मिलेगा लाभ
नए स्पष्टीकरण का एक अहम पहलू वरिष्ठ और कनिष्ठ कर्मचारियों की पात्रता से जुड़ा है। यदि किसी जूनियर कर्मचारी को प्रमोशन के लिए पात्र माना जाता है, तो उससे वरिष्ठ कर्मचारी को भी प्रमोशन का लाभ मिल सकता है, भले ही उस वरिष्ठ कर्मचारी की निचले पद पर दो साल की कुल सेवा तकनीकी रूप से पूरी न हुई हो। इसका उद्देश्य प्रमोशन प्रक्रिया में वरिष्ठ कर्मचारियों के हितों को सुरक्षित रखना और अनावश्यक विसंगति को रोकना है।
पुराने मामलों पर लागू नहीं होगा नया नियम
रेलवे बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया है कि पहले से बंद हो चुके प्रमोशन मामलों को इस नए स्पष्टीकरण के आधार पर दोबारा नहीं खोला जाएगा। यानी नियम में किया गया यह बदलाव मुख्य रूप से वर्तमान और आने वाली प्रमोशन प्रक्रियाओं पर लागू होगा।

0 comments:
Post a Comment