बिहार सरकार का बड़ा फैसला, गरीब परिवारों के लिए बड़ी खुशखबरी

पटना। बिहार के भूमिहीन गरीब परिवारों के लिए बड़ी राहत की खबर है। राज्य सरकार अभियान बसेरा-2 के तहत करीब 30 हजार पात्र भूमिहीन परिवारों को आवासीय जमीन देने की तैयारी में है। सरकार ने 15 अगस्त 2026 तक इन परिवारों को जमीन के बंदोबस्ती प्रमाणपत्र उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा है। इसका उद्देश्य ऐसे परिवारों को स्थायी आवास के लिए जमीन उपलब्ध कराना है, जिनके पास अपना घर बनाने के लिए वासभूमि नहीं है।

3 से 5 डिसमिल तक मिल सकती है जमीन

अभियान के तहत पात्र परिवारों को करीब 3 से 5 डिसमिल आवासीय जमीन उपलब्ध कराने का प्रावधान बताया गया है। तीन डिसमिल जमीन लगभग 1,307 वर्गफुट के बराबर होती है। इस जमीन का मुख्य उद्देश्य परिवार को अपना घर बनाने के लिए वासभूमि उपलब्ध कराना है। अगर 30 हजार परिवारों को न्यूनतम तीन-तीन डिसमिल जमीन मिलती है, तो कुल करीब 90 हजार डिसमिल भूमि का बंदोबस्त होगा। यानी बड़ी संख्या में गरीब परिवारों को अपना आशियाना बनाने के लिए जमीन मिल सकेगी।

किन परिवारों को मिलेगा लाभ?

इस योजना का लाभ उन परिवारों को मिलेगा जो निर्धारित पात्रता शर्तों को पूरा करते हैं। आवेदक का बिहार का निवासी होना जरूरी है। इसके अलावा परिवार के पास रहने के लिए अपनी जमीन या पक्का मकान नहीं होना चाहिए। ऐसे परिवार जो लंबे समय से सरकारी या गैर-मजरुआ जमीन पर झोपड़ी अथवा कच्चे मकान में रह रहे हैं, वे भी निर्धारित नियमों के तहत पात्र हो सकते हैं। हालांकि, अंतिम पात्रता स्थानीय स्तर पर होने वाली जांच के बाद ही तय होगी।

अंचल स्तर पर होगी जांच

भूमिहीन परिवारों की पहचान और उनके दस्तावेजों का सत्यापन स्थानीय राजस्व व्यवस्था के माध्यम से किया जाएगा। अंचल कार्यालय और राजस्व विभाग यह जांच करेंगे कि संबंधित परिवार वास्तव में भूमिहीन और जरूरतमंद है या नहीं। जांच पूरी होने के बाद पात्र परिवारों को जमीन का बंदोबस्ती प्रमाणपत्र देने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।

कमजोर वर्गों को प्राथमिकता

अभियान का मुख्य फोकस ऐसे गरीब परिवारों पर है, जिनके पास अपना घर बनाने के लिए जमीन नहीं है। पात्रता के दायरे में आने वाले महादलित, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य कमजोर आर्थिक वर्गों के भूमिहीन परिवारों को प्राथमिकता दिए जाने की बात कही गई है। सरकार की इस पहल से हजारों परिवारों को अपनी छत बनाने के लिए जमीन मिलने की उम्मीद है। इससे भूमिहीन गरीब परिवारों को स्थायी आवास की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा।

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