बिहार में जमीन मालिकों को बड़ी राहत, सरकार ने दी खुशखबरी!

पटना। बिहार में सरकारी परियोजनाओं के लिए जमीन देने वाले रैयतों के लिए राहत की खबर है। अब जमीन अधिग्रहण के दौरान मुआवजे की गणना नए बाजार मूल्य यानी एमवीआर (मिनिमम वैल्यू रजिस्टर) के आधार पर की जाएगी। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने सभी जिलाधिकारियों को इस संबंध में आवश्यक निर्देश जारी किए हैं। नई व्यवस्था 18 जून से प्रभावी मानी जाएगी।

नए बाजार मूल्य के आधार पर होगा भुगतान

सरकार के निर्देश के मुताबिक, 18 जून के बाद केंद्र या राज्य सरकार की किसी योजना के लिए जमीन अधिग्रहित की जाती है तो मुआवजे का निर्धारण संशोधित एमवीआर के आधार पर किया जाएगा। ग्रामीण इलाकों में जमीन के निर्धारित बाजार मूल्य का 1.6 गुना और शहरी क्षेत्रों में दो गुना भुगतान करने का प्रावधान है। इस बदलाव से उन जमीन मालिकों को सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है, जिनकी जमीन सड़क, हाईवे, रेलवे, सिंचाई, औद्योगिक परियोजनाओं या अन्य सरकारी योजनाओं के लिए अधिग्रहित की जाती है।

पुराने रेट को लेकर थी नाराजगी

दरअसल, लंबे समय से पुराने एमवीआर के आधार पर मुआवजा दिए जाने को लेकर जमीन मालिकों में असंतोष था। कई मामलों में रैयत पुराने मूल्य पर जमीन देने के लिए तैयार नहीं थे। इसका असर सरकारी परियोजनाओं की रफ्तार पर भी पड़ रहा था और भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया लंबी खिंच रही थी। नए एमवीआर को लागू करने से जमीन की मौजूदा बाजार स्थिति के अनुरूप मुआवजा तय करने में मदद मिलेगी। इससे अधिग्रहण की प्रक्रिया में आने वाली कई अड़चनें कम होने की उम्मीद है।

जमीन की श्रेणी तय करने का भी बदला तरीका

मुआवजे को लेकर सिर्फ बाजार मूल्य ही नहीं, बल्कि जमीन की प्रकृति को लेकर भी कई जगह विवाद सामने आते रहे हैं। पहले कई मामलों में पुराने खतियान में दर्ज जमीन की किस्म को आधार बनाकर भुगतान किया जाता था। लेकिन समय के साथ कई जमीनों का वास्तविक उपयोग बदल चुका है। अब जमीन की वर्तमान प्रकृति के आधार पर श्रेणी निर्धारण की प्रक्रिया को अधिक स्पष्ट करने का निर्देश दिया गया है। संशोधित व्यवस्था में जमीन को अलग-अलग श्रेणियों में रखकर उसके मूल्य का निर्धारण किया जाएगा।

सात श्रेणियों में होगा जमीन का वर्गीकरण

नई व्यवस्था के तहत जमीन की प्रकृति को मुख्य रूप से सात श्रेणियों में बांटा गया है। इनमें व्यावसायिक, औद्योगिक, आवासीय, हाईवे एवं मुख्य सड़कों के किनारे की जमीन, सिंचित, असिंचित और अनुपजाऊ जमीन शामिल हैं। इस वर्गीकरण का उद्देश्य जमीन के वास्तविक उपयोग और उसकी आर्थिक महत्ता को ध्यान में रखते हुए उचित मूल्य तय करना है।

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