स्टेज 1 में कैसी स्थिति होती है?
कुछ प्रकार के ब्लड कैंसर में शुरुआती चरण में बीमारी सीमित हिस्से में होती है। इस दौरान कई मरीजों में खास लक्षण दिखाई नहीं देते या सामान्य कमजोरी, थकान, वजन कम होना जैसे संकेत नजर आ सकते हैं। समय पर जांच होने पर बीमारी की पहचान जल्दी हो सकती है।
स्टेज 2 में बढ़ने लगती है बीमारी
दूसरे चरण में कैंसर प्रभावित कोशिकाएं शरीर के एक से अधिक हिस्सों में दिखाई दे सकती हैं। लिम्फोमा जैसे कैंसर में एक से ज्यादा लिम्फ नोड समूह प्रभावित हो सकते हैं। इस स्थिति में डॉक्टर जांच रिपोर्ट के आधार पर बीमारी की सीमा और उपचार की रणनीति तय करते हैं।
स्टेज 3 में बढ़ जाता है खतरा
तीसरे चरण में बीमारी शरीर के अधिक हिस्सों तक फैल चुकी हो सकती है। कुछ लिम्फोमा में डायफ्राम के ऊपर और नीचे दोनों तरफ लिम्फ नोड प्रभावित होना स्टेज 3 का संकेत हो सकता है। इस स्तर पर इलाज अधिक जटिल हो सकता है और विशेषज्ञों की निगरानी जरूरी होती है।
स्टेज 4 को क्यों माना जाता है ज्यादा गंभीर?
आम तौर पर जिन ब्लड कैंसर में स्टेज 4 का वर्गीकरण होता है, उसमें बीमारी शरीर के दूर के अंगों या ऊतकों तक फैल सकती है। उदाहरण के लिए कुछ लिम्फोमा में अस्थि मज्जा, फेफड़े या लिवर जैसे अंग प्रभावित हो सकते हैं। इसलिए स्टेज 4 को आम तौर पर अधिक गंभीर चरण माना जाता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि इलाज की संभावना खत्म हो जाती है।
हर ब्लड कैंसर में 4 स्टेज नहीं होती
यह बात खास तौर पर ध्यान देने वाली है। ल्यूकेमिया में अक्सर स्टेज 1-4 वाला सिस्टम इस्तेमाल नहीं किया जाता। डॉक्टर ब्लड टेस्ट, बोन मैरो जांच, इमेजिंग और अन्य रिपोर्ट के आधार पर बीमारी का प्रकार और जोखिम निर्धारित करते हैं। वहीं लिम्फोमा में स्टेजिंग का इस्तेमाल ज्यादा आम है।

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