इस योजना की खास बात यह होगी कि छात्रों को उनकी कमजोरी के अनुसार पढ़ाया जाएगा। जिस विषय में विद्यार्थी कमजोर या अनुत्तीर्ण हुआ है, उसी विषय पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। उदाहरण के लिए गणित में परेशानी होने पर छात्र को गणित की अतिरिक्त तैयारी कराई जाएगी।
शिक्षा विभाग मैट्रिक और इंटर में असफल छात्रों का आंकड़ा जुटा रहा है, ताकि अलग-अलग क्षेत्रों में जरूरत के हिसाब से कोचिंग की व्यवस्था की जा सके। छात्रों की सुविधा को देखते हुए कोचिंग सेंटर स्कूलों के आसपास बनाए जाने की योजना है।
पढ़ाई के साथ ऑनलाइन सामग्री और विशेषज्ञ शिक्षकों की मदद भी उपलब्ध कराई जा सकती है। समय-समय पर छोटे टेस्ट लेकर विद्यार्थियों की तैयारी का आकलन किया जाएगा और जहां कमी होगी, वहां दोबारा विशेष तैयारी कराई जाएगी।
सरकार का उद्देश्य सिर्फ छात्रों को फिर से परीक्षा दिलाना नहीं, बल्कि उनकी पिछली कमियों को दूर कर बेहतर परिणाम हासिल करने में मदद करना है। यह योजना उन हजारों विद्यार्थियों के लिए बड़ी खुशखबरी साबित हो सकती है, जो एक बार असफल होने के बाद दोबारा सफलता पाने की तैयारी कर रहे हैं।
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