यूपी में ये नया नियम लागू, सभी को जानना जरूरी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने जातिगत भेदभाव को खत्म करने की दिशा में एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। राज्य में अब जाति के आधार पर किसी भी प्रकार का सार्वजनिक प्रदर्शन, प्रचार या उल्लेख प्रतिबंधित कर दिया गया है। इस नए नियम के तहत अब निजी वाहनों की नंबर प्लेट या अन्य हिस्सों पर जाति लिखवाना पूरी तरह गैरकानूनी हो गया है, और ऐसा करने पर जुर्माना भी लगाया जाएगा।

नंबर प्लेट पर जाति लिखना अपराध माना जाएगा

अब कोई भी व्यक्ति अपने वाहन की नंबर प्लेट पर जाति लिखवाकर उसका प्रदर्शन नहीं कर सकेगा। यदि कोई व्यक्ति ऐसा करता है, तो उस पर केंद्रीय मोटर वाहन अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी। नंबर प्लेट पर जाति लिखने पर ₹5000 तक का चालान। वाहन के शीशे या अन्य हिस्सों पर जाति आधारित स्लोगन या स्टिकर लगाने पर ₹2000 तक का जुर्माना लगेगा।

एफआईआर और पुलिस रिकॉर्ड में जाति का कोई उल्लेख नहीं

अब पुलिस दस्तावेजों में भी जाति दर्ज नहीं की जाएगी। एफआईआर में आरोपी या वादी की जाति नहीं लिखी जाएगी, सिवाय एससी-एसटी एक्ट के मामलों के। गिरफ्तारी मेमो, हिस्ट्रीशीटर बोर्ड, और अन्य रिपोर्ट्स से भी जाति से जुड़ी सूचनाएं हटाई जाएंगी।

सोशल मीडिया पर भी जातिगत कंटेंट पर रोक

जातिगत भावना भड़काने या महिमामंडन करने वाले सोशल मीडिया पोस्ट अब पूरी तरह प्रतिबंधित हैं। जातिगत घृणा फैलाने या समुदाय विशेष के महिमामंडन वाले कंटेंट पर कार्रवाई की जाएगी। पुलिस अब इंटरनेट मीडिया की सक्रिय मॉनिटरिंग करेगी ताकि ऐसे कंटेंट को समय रहते हटाया जा सके।

सार्वजनिक स्थानों पर जाति संकेत पर भी रोक

राज्य सरकार ने निर्देश दिया है कि: साइन बोर्ड, गेट, थानों के नोटिस बोर्ड, और वाहनों पर जातिगत नारे हटाए जाएं। कोई भी क्षेत्र या मोहल्ला जातिगत नाम से "जागीर" या "इलाका" घोषित नहीं किया जा सकेगा। भविष्य में ऐसे बोर्ड न लगें, इसके लिए स्थायी व्यवस्थाएं की जाएंगी।

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