अमेरिका, रूस, चीन और भारत की हाईटेक ताकत की टक्कर!

नई दिल्ली। 21वीं सदी की जंग अब सिर्फ गोलियों और टैंकों की नहीं रही। दुनिया की महाशक्तियाँ अब ऐसे हथियार बना रही हैं जो इंसान की सोच से तेज़, रोशनी की रफ्तार से मार करने वाले और अंतरिक्ष तक वार करने की क्षमता रखते हैं। अमेरिका, रूस, चीन और भारत ये चार देश अब एक ऐसी दौड़ में शामिल हैं।

AI: जंग की 'स्मार्ट' रणनीति

कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अब युद्ध रणनीति का अहम हिस्सा बन चुकी है। ड्रोन से लेकर साइबर सुरक्षा तक, हर क्षेत्र में AI का इस्तेमाल हो रहा है। अमेरिका ने रक्षा अनुसंधान एजेंसी DARPA के ज़रिए कई AI आधारित हथियार विकसित किए हैं जो बिना इंसानी हस्तक्षेप के निर्णय ले सकते हैं। जबकि चीन ने AI ड्रोन स्क्वॉड और निगरानी प्रणाली को युद्ध रणनीति में शामिल किया है। वहीं, भारत भी तेजी से इस क्षेत्र में काम कर रहा है।

लेज़र हथियार: युद्ध में रोशनी की रफ्तार

लेज़र हथियारों को भविष्य के सबसे सटीक और तेज़ हथियारों में गिना जा रहा है। ये न केवल सस्ते होते हैं, बल्कि दुश्मन के मिसाइल या ड्रोन को पल भर में खत्म करने की क्षमता रखते हैं। अमेरिका के पास पहले से ही नौसेना में तैनात लेज़र सिस्टम हैं। रूस ने भी 'पेरेस्वेत' नामक लेज़र सिस्टम विकसित किया है जो सैटेलाइट और ड्रोन को अंधा कर सकता है। भारत ने हाल ही में सफल लेज़र हथियार परीक्षण किया हैं।

हाइपरसोनिक मिसाइलें: रडार से भी तेज

हाइपरसोनिक हथियार वे हैं जो आवाज़ की गति (मैक 5) से कई गुना तेज़ होते हैं। इन्हें पकड़ना मौजूदा एयर डिफेंस सिस्टम के लिए बेहद मुश्किल है। रूस का 'अवनगार्ड' और 'जिरकॉन' हाइपरसोनिक सिस्टम पूरी तरह सक्रिय है। चीन DF-ZF नामक हाइपरसोनिक ग्लाइडर पर वर्षों से काम कर रहा है और कई सफल परीक्षण कर चुका है। अमेरिका HAWC और ARRW जैसे हाइपरसोनिक प्रोग्राम विकसित कर रहा है, हालाँकि चुनौतियाँ बनी हुई हैं। भारत भी इस दौड़ में पीछे नहीं है।

एंटी-सैटेलाइट सिस्टम: अंतरिक्ष में जंग की तैयारी

आज की सेनाओं के लिए सैटेलाइट आँख और कान की तरह हैं और उन्हें नष्ट करना दुश्मन की पूरी कम्युनिकेशन प्रणाली को जड़ से हिला सकता है। अमेरिका और रूस दशकों से इस तकनीक पर  दबदबा रखते हैं। चीन ने 2007 में अपने ही सैटेलाइट को मार गिराकर दुनिया को चौंका दिया था। जबकि भारत ने 2019 में ‘मिशन शक्ति’ के तहत पहली बार एक लाइव सैटेलाइट को निशाना बनाकर सफल ASAT परीक्षण किया। 

0 comments:

Post a Comment