क्या है जैविक सच्चाई?
पुरुषों में स्पर्म (शुक्राणु) का निर्माण किशोरावस्था के बाद शुरू होता है और जीवनभर जारी रह सकता है। तकनीकी रूप से पुरुष अधिक उम्र में भी पिता बन सकते हैं। 60, 70 और यहां तक कि उससे अधिक उम्र में भी पुरुषों के पिता बनने के उदाहरण मौजूद हैं।
उम्र के साथ क्या बदलता है?
डॉक्टरों के अनुसार 35-40 वर्ष की आयु के बाद पुरुषों में स्पर्म की गुणवत्ता में धीरे-धीरे गिरावट आनी शुरू हो सकती है। इसमें शामिल हैं: स्पर्म काउंट में कमी, स्पर्म की गतिशीलता में गिरावट, डीएनए फ्रैगमेंटेशन का जोखिम बढ़ना, हार्मोन टेस्टोस्टेरोन के स्तर में कमी। हालांकि यह गिरावट हर व्यक्ति में समान नहीं होती, लेकिन 45-50 वर्ष के बाद जोखिम बढ़ने की संभावना अधिक देखी गई है।
बच्चों के स्वास्थ्य पर प्रभाव
कुछ अंतरराष्ट्रीय अध्ययनों में पाया गया है कि अधिक उम्र में पिता बनने से शिशु में कुछ स्वास्थ्य जोखिम बढ़ सकते हैं, जैसे ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर का जोखिम, कुछ आनुवंशिक विकारों की संभावना, गर्भधारण में अधिक समय लगना। हालांकि विशेषज्ञ स्पष्ट करते हैं कि ये जोखिम “संभावना” के स्तर पर होते हैं, और हर मामले में ऐसा होना जरूरी नहीं है।
पिता बनने की क्या है आदर्श उम्र?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि जैविक दृष्टि से 25 से 35 वर्ष की उम्र पुरुषों के लिए प्रजनन क्षमता के लिहाज से सबसे अनुकूल मानी जाती है। इस अवधि में स्पर्म की गुणवत्ता और हार्मोन स्तर आमतौर पर बेहतर होते हैं। फिर भी, आज की जीवनशैली, करियर प्राथमिकताएं और सामाजिक बदलावों के कारण कई पुरुष 35 वर्ष के बाद पिता बनने का निर्णय लेते हैं। ऐसे में नियमित स्वास्थ्य जांच और जीवनशैली में सुधार अहम भूमिका निभा सकते हैं।
पिता बनने को लेकर विशेषज्ञ क्या सलाह देते हैं?
डॉक्टरों की सलाह है कि यदि कोई पुरुष 35-40 वर्ष के बाद पिता बनने की योजना बना रहा है, तो वह पहले एक फर्टिलिटी टेस्ट करवा सकता है। स्पर्म एनालिसिस के जरिए स्पर्म काउंट, मोटिलिटी और संरचना की जांच की जाती है। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, तनाव प्रबंधन और नशे से दूरी ये सभी कदम प्रजनन क्षमता को बेहतर बनाए रखने में मददगार हो सकते हैं।
0 comments:
Post a Comment