रूस का बड़ा फैसला, अमेरिका खुश, ट्रंप की बड़ी चिंता दूर!

नई दिल्ली। ब्रिक्स को लेकर लंबे समय से चल रही अटकलों के बीच रूस ने एक अहम स्पष्टीकरण दिया है। रूस के उप विदेश मंत्री और ब्रिक्स में मॉस्को के शेरपा सर्गेई रयाबकोव ने साफ कर दिया है कि ब्रिक्स देशों की फिलहाल किसी साझा (कॉमन) मुद्रा बनाने की योजना नहीं है। उनके इस बयान को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए राहत भरा संकेत माना जा रहा है।

कॉमन करेंसी पर रूस की स्पष्टता

दिल्ली में 9 से 11 फरवरी के बीच आयोजित ब्रिक्स शेरपाओं की बैठक के दौरान रयाबकोव ने स्पष्ट कहा कि समूह किसी एक साझा मुद्रा की स्थापना पर काम नहीं कर रहा है। उनका जोर इस बात पर था कि सदस्य देश अपनी-अपनी राष्ट्रीय मुद्राओं के उपयोग को बढ़ावा देना चाहते हैं, न कि किसी नई अंतरराष्ट्रीय मुद्रा को लॉन्च करना।

क्या डॉलर को चुनौती देना लक्ष्य है?

रूसी प्रतिनिधि ने यह भी कहा कि राष्ट्रीय मुद्राओं में व्यापार को बढ़ाना डॉलर को कमजोर करने की रणनीति नहीं है। रूस का तर्क है कि प्रतिबंधों और वित्तीय पाबंदियों के कारण उसे वैकल्पिक भुगतान व्यवस्थाओं की तलाश करनी पड़ी। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी कई बार कह चुके हैं कि यदि रूस को डॉलर-आधारित वित्तीय प्रणाली से बाहर नहीं किया गया होता, तो हालात अलग हो सकते थे।

ब्रिक्स का असली एजेंडा क्या है?

ब्रिक्स का जोर फिलहाल सदस्य देशों के बीच व्यापार, निवेश और बुनियादी ढांचा विकास को आसान बनाने पर है। इसके लिए सीमा-पार भुगतान प्रणाली (क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट सिस्टम) पर चर्चा की जा रही है, ताकि लेन-देन अधिक सुगम और कम लागत वाला हो सके।

ट्रंप की चिंता क्यों थी?

रियो डी जनेरियो में हुए ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के बाद जब पेमेंट टास्क फोर्स की घोषणा हुई, तब अमेरिकी हलकों में यह चर्चा तेज हो गई थी कि ब्रिक्स वैश्विक वित्तीय व्यवस्था में समानांतर ढांचा खड़ा करने की तैयारी कर रहा है। ट्रंप लंबे समय से अमेरिकी डॉलर की वैश्विक प्रधानता को अमेरिका की ताकत का अहम स्तंभ मानते रहे हैं। ऐसे में किसी भी वैकल्पिक व्यवस्था को वे संभावित चुनौती के रूप में देखते हैं।

हालिया रूसी बयान से यह संकेत गया है कि फिलहाल ब्रिक्स का फोकस साझा मुद्रा पर नहीं है, जिससे तत्काल टकराव की आशंका कम होती दिख रही है। इस समय ब्रिक्स की अध्यक्षता भारत के पास है और नई दिल्ली बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था और संतुलित कूटनीति की पक्षधर रही है।

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