डिलीवरी की नई टाइमलाइन
रूसी अधिकारियों के अनुसार, S-400 का चौथा स्क्वाड्रन मई के अंत या जून की शुरुआत तक भारत पहुंच सकता है, जबकि पांचवां और अंतिम स्क्वाड्रन नवंबर तक मिलने की उम्मीद है। भारत और रूस के बीच 2018 में लगभग 40 हजार करोड़ रुपये की डील के तहत पांच स्क्वाड्रन की आपूर्ति तय हुई थी। अब शेष दो रेजिमेंट के आने से यह समझौता पूरा होने की दिशा में बढ़ेगा।
संवेदनशील सीमाओं पर तैनाती
भारतीय वायुसेना पहले ही तीन S-400 बैटरियों को पश्चिमी और उत्तरी सेक्टर में तैनात कर चुकी है। ये इलाके रणनीतिक दृष्टि से बेहद संवेदनशील माने जाते हैं। S-400 को भारत की वायु रक्षा प्रणाली की रीढ़ कहा जाता है, क्योंकि यह लंबी दूरी से आने वाले हवाई खतरों का सटीक पता लगाकर उन्हें निष्क्रिय करने में सक्षम है।
S-400 की क्षमता क्या है?
रूस निर्मित S-400 एक अत्याधुनिक लॉन्ग रेंज सतह से हवा में मार करने वाला मिसाइल सिस्टम है। इसकी रडार प्रणाली 600 किलोमीटर तक की दूरी से एक साथ 100 से अधिक लक्ष्यों पर नजर रख सकती है। यह विभिन्न रेंज की इंटरसेप्टर मिसाइलों से लैस है, करीब 120 किमी, 250 किमी और 400 किमी तक मार करने वाली मिसाइलें इसमें शामिल हैं।
यह सिस्टम 400 किलोमीटर तक की रेंज में दुश्मन के लड़ाकू विमान, क्रूज़ मिसाइल और बैलिस्टिक मिसाइल जैसे खतरों को निशाना बना सकता है। मल्टी-लेयर डिफेंस क्षमता इसे दुनिया के सबसे प्रभावी एयर डिफेंस सिस्टम्स में शामिल करती है।

0 comments:
Post a Comment