चीन सबसे आगे
पिछले पांच वर्षों में सोने की सबसे अधिक खरीद करने वाले देशों में चीन शीर्ष पर रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, चीन ने 357 टन से अधिक सोना खरीदा। विशेषज्ञों का मानना है कि आधिकारिक आंकड़ों से इतर वास्तविक खरीद इससे अधिक भी हो सकती है।
पोलैंड, तुर्की और भारत
चीन के बाद पोलैंड ने बड़े पैमाने पर सोने की खरीद की और 300 टन से अधिक भंडार जोड़ा। तुर्की और भारत भी इस सूची में प्रमुख रहे। तुर्की ने 250 टन से ज्यादा और भारत ने लगभग 245 टन सोना खरीदा। भारत के लिए सोना पारंपरिक रूप से सुरक्षित निवेश का माध्यम रहा है, और केंद्रीय बैंक भी इसे रणनीतिक संपत्ति के रूप में देख रहा है। इसके अलावा ब्राजील, अजरबैजान, जापान, थाईलैंड, हंगरी और सिंगापुर जैसे देशों ने भी उल्लेखनीय मात्रा में सोना खरीदा हैं।
किन देशों ने घटाया सोना?
जहां कई देशों ने सोना खरीदा, वहीं कुछ देशों ने अपने गोल्ड रिजर्व में कमी की। फिलीपींस इस सूची में सबसे आगे रहा, जिसने पिछले पांच साल में सबसे ज्यादा सोना बेचा। कजाकस्तान और श्रीलंका ने भी उल्लेखनीय मात्रा में सोना बेचा। श्रीलंका का कदम उसके आर्थिक संकट से जुड़ा माना जाता है। जर्मनी, मंगोलिया, ताजिकिस्तान, यूरो एरिया, कोलंबिया और फिनलैंड जैसे देशों ने भी अपने भंडार में आंशिक कमी की। इन देशों के फैसलों के पीछे अलग-अलग आर्थिक और वित्तीय कारण रहे।
क्यों बढ़ रही है सोने की अहमियत?
वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, मुद्रास्फीति, भू-राजनीतिक तनाव और मुद्रा बाजार में उतार-चढ़ाव ने सोने को फिर से सुरक्षित निवेश के रूप में स्थापित किया है। केंद्रीय बैंक अपने रिजर्व को स्थिर और सुरक्षित रखने के लिए सोने पर भरोसा जता रहे हैं। 2020 से 2025 का दौर सोने के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हुआ है। जहां एक ओर कीमतों में रिकॉर्ड वृद्धि हुई, वहीं दूसरी ओर कई देशों ने रणनीतिक रूप से अपने गोल्ड रिजर्व को मजबूत किया।

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