रूस ने फिर दिया भारत का साथ, अमेरिका हैरान, ट्रंप सन्न!

नई दिल्ली। भारत और रूस की दोस्ती दशकों पुरानी है। बदलती वैश्विक राजनीति, नए गठजोड़ और आर्थिक समीकरणों के बीच भी यह संबंध अपनी मजबूती बनाए हुए है। हाल ही में भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के बाद कुछ विश्लेषकों ने कयास लगाए थे कि कहीं नई रणनीतिक नज़दीकियां भारत-रूस संबंधों को प्रभावित न कर दें। लेकिन ताज़ा घटनाक्रम ने इन अटकलों पर विराम लगा दिया है।

भारत के साथ रूस

रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने एक साक्षात्कार में कहा कि भारत का एजेंडा वर्तमान वैश्विक चुनौतियों के अनुरूप है और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। उन्होंने संकेत दिया कि ब्रिक्स समूह की अध्यक्षता के दौरान भारत के एजेंडे को रूस सक्रिय समर्थन देगा।

आतंकवाद और सुरक्षा पर फोकस

भारत लंबे समय से आतंकवाद के मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाता रहा है। ब्रिक्स की अध्यक्षता के दौरान भी नई दिल्ली ने आतंकवाद-रोधी सहयोग को प्राथमिकता दी है। रूस ने इसे बेहद महत्वपूर्ण बताया है, खासकर ऐसे समय में जब एशिया के कुछ हिस्सों में चरमपंथी गतिविधियां चिंता का विषय बनी हुई हैं।

ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा का महत्व

वैश्विक स्तर पर ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक तनावों ने ऊर्जा सुरक्षा को बड़ी चुनौती बना दिया है। रूस ने माना है कि भारत द्वारा इस मुद्दे को प्राथमिकता देना समय की मांग है। खाद्य सुरक्षा भी समान रूप से महत्वपूर्ण है, विशेषकर विकासशील देशों के लिए।

तकनीक और एआई में सहयोग

भारत सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) सुरक्षा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) जैसे उभरते क्षेत्रों में भी सक्रिय भूमिका निभा रहा है। प्रस्तावित एआई शिखर सम्मेलन में रूस की भागीदारी इस बात का संकेत है कि दोनों देश नई तकनीकों में साझेदारी को बढ़ाना चाहते हैं। डिजिटल सुरक्षा और डेटा संप्रभुता जैसे मुद्दों पर भी साझा दृष्टिकोण विकसित करने की कोशिश हो रही है।

बदलते समीकरणों के बीच स्थिर संबंध

भारत आज बहु-आयामी कूटनीति का पालन कर रहा है, एक ओर अमेरिका और पश्चिमी देशों के साथ व्यापार व तकनीकी सहयोग, तो दूसरी ओर रूस जैसे पारंपरिक साझेदार के साथ रणनीतिक संबंध। ब्रिक्स की अध्यक्षता पर रूस का खुला समर्थन इस बात का प्रमाण है कि नई साझेदारियां पुरानी दोस्ती को कमजोर नहीं कर रहीं।

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