बिहार की ये सड़क होगी 4-लेन, इन जिलों के लिए खुशखबरी!

पटना। बिहार में सड़क अवसंरचना को मजबूत करने की दिशा में एक अहम पहल सामने आई है। पटना-औरंगाबाद-हरिहरगंज मार्ग को फोरलेन में बदलने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। राष्ट्रीय राजमार्ग-139 के रूप में चिन्हित यह सड़क राजधानी पटना को दक्षिण बिहार के प्रमुख जिलों से जोड़ती है। बढ़ते यातायात दबाव को देखते हुए इसके चौड़ीकरण की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही थी।

डीपीआर तैयार, केंद्र से मिली सहमति

विधानसभा में पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में पथ निर्माण मंत्री दिलीप जायसवाल ने बताया कि सड़क को चार लेन में विकसित करने के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की जा रही है। राज्य सरकार की ओर से इस संबंध में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री को पत्र भेजा गया था, जिसके जवाब में केंद्र ने डीपीआर प्रस्तुत करने को कहा है। रिपोर्ट तैयार होने के बाद आगे की स्वीकृति और बजट प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

इस परियोजना के पूरा होने से पटना, औरंगाबाद और हरिहरगंज के बीच आवागमन तेज और सुरक्षित होगा। साथ ही गया, अरवल और आसपास के जिलों को भी अप्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। मालवाहक वाहनों की आवाजाही आसान होने से व्यापार और उद्योग को भी गति मिलने की उम्मीद है।

नवादा में जर्जर सड़क के सुदृढ़ीकरण की मांग

इधर, नवादा नगर से एनएच-20 को जोड़ने वाली सड़क की खराब स्थिति को लेकर भी विधान परिषद में मुद्दा उठाया गया। वार्ड संख्या पांच स्थित अग्रवाल पेट्रोल पंप के सामने से हड्डी गोदाम होते हुए राष्ट्रीय राजमार्ग तक जाने वाली सड़क लंबे समय से जर्जर बताई जा रही है। स्थानीय लोगों को आवागमन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। 

विधान पार्षद अशोक कुमार ने सदन में इस सड़क के पुनर्निर्माण और सुदृढ़ीकरण की मांग की। उनका कहना है कि यह मार्ग शहर के लिए महत्वपूर्ण संपर्क सड़क है और इसकी मरम्मत से हजारों लोगों को राहत मिलेगी।

विकास को मिलेगी रफ्तार

पटना-औरंगाबाद-हरिहरगंज सड़क का फोरलेन विस्तार और नवादा की सड़कों का सुदृढ़ीकरण, दोनों ही परियोजनाएं क्षेत्रीय विकास के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं। बेहतर सड़क नेटवर्क से न केवल यात्रा समय घटेगा, बल्कि व्यापार, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच भी आसान होगी।

राज्य में बढ़ते यातायात और आर्थिक गतिविधियों को देखते हुए सड़क परियोजनाओं को प्राथमिकता दी जा रही है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि प्रस्तावित योजनाएं कब तक जमीन पर उतरती हैं और लोगों को उनका लाभ मिलना शुरू होता है।

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