भारत ने बनाया 'AI-लेजर स्नाइपर', जानकर चौंक जाएंगे

नई दिल्ली। भारत की रक्षा तकनीक अब पारंपरिक हथियारों से आगे बढ़कर स्मार्ट और सटीक प्रणालियों की ओर बढ़ रही है। घरेलू कंपनी Olee ने हाल ही में 2 किलोवॉट क्षमता वाला AI-पावर्ड लेजर स्नाइपर विकसित किया है, जिसे मानव रहित जमीनी वाहन (UGV) पर लगाया जा सकता है। यह प्रणाली विशेष रूप से ड्रोन स्वॉर्म और नजदीकी खतरों से निपटने के लिए बनाई गई है।

कैसे काम करता है सिस्टम:

इस लेजर स्नाइपर की सबसे बड़ी खासियत इसका पूरा इंटीग्रेशन है। इसमें लेजर मॉड्यूल, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित टारगेटिंग और मोबाइल UGV एक साथ काम करते हैं। पारंपरिक गोलियों के बजाय यह फोकस्ड एनर्जी का इस्तेमाल कर लक्ष्य को कुछ ही सेकंड में निष्क्रिय कर सकता है।

लक्ष्यों पर असर:

2 किलोवॉट क्षमता वाला यह लेजर कम दूरी पर प्रभावी है। यह दुश्मन के ऑप्टिकल सेंसर को अंधा कर सकता है, हमलावर को अस्थायी रूप से निष्क्रिय कर सकता है और खुले हिस्सों वाले वाहनों को नुकसान पहुंचा सकता है। यानी, स्थिति के अनुसार यह घातक या गैर-घातक प्रतिक्रिया दे सकता है।

हर मौसम में प्रभावी:

AI सिस्टम स्वचालित रूप से खतरे की पहचान और प्राथमिकता तय करता है। स्वॉर्म अटैक जैसी स्थितियों में, जहां कई खतरे एक साथ होते हैं, यह तकनीक इंसानी प्रतिक्रिया की तुलना में कहीं तेज़ी से काम कर सकती है। कंपनी के अनुसार, धूल, नमी और तापमान जैसी परिस्थितियों में सफल फील्ड ट्रायल इसे व्यावहारिक और भरोसेमंद बनाते हैं।

फायदे और भविष्य:

डायरेक्टेड एनर्जी वेपन कम लॉजिस्टिक जरूरत और बार-बार इस्तेमाल की क्षमता के कारण लंबे समय तक सुरक्षा के लिए उपयोगी हैं। UGV पर यह लेजर सैनिकों को जोखिम से दूर रखते हुए संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी और सटीक कार्रवाई में मदद कर सकता है।

स्वदेशी तकनीक की अहमियत:

AI-पावर्ड लेजर स्नाइपर भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता को मजबूत करता है। स्थानीय जरूरतों के अनुसार सिस्टम को अनुकूलित करना भविष्य की युद्ध रणनीति में अहम साबित होगा। यह तकनीक दिखाती है कि अब युद्ध प्रणालियाँ तेज, स्मार्ट और सटीक बन रही हैं और आने वाले समय में ये बहुस्तरीय रक्षा संरचना का हिस्सा बन सकती हैं।

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