बिहार में बनेगी 188KM नई रेल लाइन, इन जिलों को खुशखबरी

न्यूज डेस्क। सीतामढ़ी–निर्मली रेल लाइन परियोजना एक बार फिर सुर्खियों में है। वर्षों तक फाइलों में अटकी यह योजना अब जमीन पर उतरने की दिशा में आगे बढ़ती दिखाई दे रही है। वर्ष 2008 में स्वीकृत इस परियोजना को 2019 में रोक दिया गया था, लेकिन सितंबर 2025 में इसे दोबारा सक्रिय कर दिया गया। अब इसके लिए फाइनल लोकेशन सर्वे और डीपीआर तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।

188.9 किलोमीटर लंबा होगा रेलखंड

समस्तीपुर रेल मंडल के अंतर्गत प्रस्तावित यह रेल लाइन कुल 188.9 किलोमीटर लंबी होगी। इसमें से लगभग 88.9 किलोमीटर हिस्सा सीतामढ़ी क्षेत्र में पड़ेगा। सर्वे और डीपीआर की प्रक्रिया पूरी होते ही निर्माण कार्य का रास्ता साफ हो जाएगा। रेलवे द्वारा नया टेंडर जारी किया जाना इस बात का संकेत है कि इस बार परियोजना को आगे बढ़ाने को लेकर गंभीरता दिखाई जा रही है।

इन क्षेत्रों से होकर गुजरेगी ट्रेन

प्रस्तावित रेल लाइन सीतामढ़ी से शुरू होकर अमघट्टा, भैरोकोठी, बरियारपुर, बथनाहा, लत्तीपुर, दिग्घी, गोनाही, बेला, परसा, दोस्तियां, चिलारा, हरिहरपुर, दलकवा, राजबाड़ा, पकड़िया, नरंगा, परिहार, मसहां, बनौली, सुरसंड, भिट्ठामोड़ और चोरौत जैसे कई गांवों से गुजरते हुए जयनगर और निर्मली तक पहुंचेगी। इससे दर्जनों ग्रामीण और अर्द्धशहरी इलाकों को पहली बार सीधी रेल सुविधा मिल सकेगी

मिथिलांचल-सीमांचल को लाभ

नई रेल लाइन शुरू होने से सीतामढ़ी, जयनगर, मधुबनी और निर्मली सहित पूरे मिथिलांचल और सीमांचल क्षेत्र की कनेक्टिविटी बेहतर होगी। फिलहाल इन इलाकों में रेल नेटवर्क सीमित है, जिससे लोगों को लंबी दूरी तय करने में कठिनाई होती है। नई लाइन से यात्रा समय कम होगा और आवागमन अधिक सुविधाजनक बनेगा।

व्यापार और रोजगार को बढ़ावा

बेहतर रेल संपर्क का सीधा असर स्थानीय अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। कृषि उत्पादों, डेयरी, मछली पालन और छोटे उद्योगों को बड़े बाजार तक पहुंच मिलेगी। इससे व्यापारिक गतिविधियां बढ़ेंगी और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। उम्मीद है कि इससे पलायन की समस्या पर भी कुछ हद तक रोक लग सकेगी।

उम्मीदों को फिर मिली नई दिशा

डीपीआर और सर्वे प्रक्रिया पूरी होने के बाद निर्माण कार्य शुरू होने की संभावना है। यदि सब कुछ तय समय पर हुआ, तो आने वाले वर्षों में यह रेल परियोजना उत्तर-पूर्वी बिहार की तस्वीर बदलने में अहम भूमिका निभा सकती है। लंबे इंतजार के बाद अब स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि यह सपना जल्द ही हकीकत में बदलेगा।

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