MIRV तकनीक और इसकी ताकत
MIRV प्रणाली सामान्य परमाणु मिसाइलों से बहुत अधिक खतरनाक मानी जाती है। यह सिर्फ एक मिसाइल के माध्यम से कई वारहेड्स को अलग-अलग देशों या सैन्य ठिकानों पर दाग सकती है। इसके कारण, किसी भी दुश्मन के लिए इंटरसेप्शन लगभग असंभव हो जाता है। इसके अलावा, इसका रणनीतिक महत्व इतना है कि इसे रखने वाला देश अपने प्रतिद्वंदियों पर हावी हो सकता है।
कौन-कौन से देश रखते हैं MIRV तकनीक?
अमेरिका – अमेरिका ने सबसे पहले MIRV तकनीक विकसित की और इसे अपने ICBM और SLBM मिसाइलों में तैनात किया। अमेरिकी MIRV मिसाइलें कई देशों को कवर कर सकती हैं और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हैं।
रूस – रूस MIRV तकनीक में अमेरिका का सीधा प्रतिद्वंदी है। रूसी MIRV मिसाइलें विशेष रूप से उच्च शक्ति वाले वारहेड्स के लिए जानी जाती हैं और इसे Sarmat और Topol जैसे मिसाइल सिस्टम में इस्तेमाल किया जाता है।
चीन – चीन ने भी अपने इंटरकांटिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइलों में MIRV तकनीक को शामिल किया है। चीनी मिसाइलें सीमित संख्या में युद्धसामग्री को अलग-अलग दिशा में भेज सकती हैं।
फ्रांस – फ्रांस अपने रणनीतिक हथियारों में MIRV तकनीक का उपयोग करता है। फ्रांस के SLBM और ICBM में कई स्वतंत्र टारगेटिंग वारहेड्स की क्षमता है।
ब्रिटेन – ब्रिटेन ने भी अपने ट्राइडेंट मिसाइल सिस्टम में MIRV तकनीक को शामिल किया है। हालांकि ब्रिटेन की संख्या सीमित है, लेकिन यह यूरोप में रणनीतिक शक्ति बनाए रखने के लिए पर्याप्त है।
भारत – भारत ने हाल के वर्षों में MIRV तकनीक विकसित की है। भारतीय Agni-V और Agni-P मिसाइलें इस तकनीक से लैस हैं और यह देश को अपनी परमाणु शक्ति में मजबूती देती हैं।

0 comments:
Post a Comment