APK फाइल के जरिए जाल
यह ऐप किसी आधिकारिक ऐप स्टोर पर उपलब्ध नहीं है। इसे APK फाइल के रूप में सीधे डाउनलोड करने को कहा जाता है। तकनीकी जानकारों के मुताबिक, इस तरह की फाइलें फोन में इंस्टॉल होते ही बैकग्राउंड में काम शुरू कर देती हैं और यूजर को पता भी नहीं चलता कि उसकी निजी सूचनाएं खतरे में हैं।
सरकारी एजेंसियों की चेतावनी
गृह मंत्रालय की साइबर जागरूकता पहल Cyber Dost ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। स्पष्ट किया गया है कि सरकार कभी भी निजी मैसेज या व्हाट्सएप के जरिए कोई ऐप डाउनलोड करने को नहीं कहती। वेतन आयोग से जुड़ी आधिकारिक जानकारी केवल मान्यता प्राप्त सरकारी माध्यमों से ही जारी होती है।
कैसे होता है नुकसान?
साइबर विशेषज्ञ बताते हैं कि फर्जी ऐप मोबाइल में मौजूद मैसेज, बैंकिंग डिटेल और ओटीपी तक पहुंच बना सकता है। कुछ ही मिनटों में खाते से रकम निकल सकती है और पीड़ित को देर से पता चलता है। इसलिए किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करना भारी पड़ सकता है।
क्या बरतें सावधानी?
अनजान स्रोत से आई फाइल डाउनलोड न करें।
किसी भी स्थिति में ओटीपी या बैंक संबंधी जानकारी साझा न करें।
संदिग्ध ऐप इंस्टॉल हो जाए तो तुरंत हटाएं और जरूरत पड़े तो फोन रीसेट करें।
ठगी की आशंका होने पर 1930 हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराएं।
कर्मचारियों के लिए जरूरी है कि वे 8वें वेतन आयोग से संबंधित खबरें केवल आधिकारिक वेबसाइट या विश्वसनीय समाचार स्रोतों से ही देखें। डिजिटल दौर में जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है।

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