सदन में उठा आवास का मुद्दा
विधानसभा में इस विषय पर चर्चा तब तेज हुई जब RJD विधायक सौरभ कुमार ने अधूरे पड़े आवासों का सवाल उठाया। उनका कहना था कि चुनाव से पहले बड़े पैमाने पर घर देने का वादा किया गया था, लेकिन अब तक लक्ष्य के मुकाबले काफी कम आवास पूरे हो सके हैं। कई लाभार्थियों को पहली किस्त मिलने के बाद निर्माण कार्य रोकना पड़ा, जिससे वे मुश्किल हालात में जीने को मजबूर हैं।
सरकार का जवाब और भरोसा
ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने सदन में जवाब देते हुए कहा कि सरकार हर पात्र परिवार को घर उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने माना कि योजना के क्रियान्वयन में कुछ प्रशासनिक और प्रक्रियागत देरी हुई है, लेकिन अब स्थिति को पटरी पर लाने की कोशिश की जा रही है।
मंत्री के अनुसार, केंद्र सरकार से अब तक 91 करोड़ रुपये प्राप्त हो चुके हैं और मार्च के अंत तक अतिरिक्त राशि मिलने की उम्मीद है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि धन की कमी के कारण योजना बंद नहीं है, बल्कि तकनीकी और प्रक्रियात्मक कारणों से विलंब हुआ।
फंडिंग का फार्मूला
आवास योजना के तहत प्रत्येक घर के निर्माण में 60 प्रतिशत राशि केंद्र सरकार और 40 प्रतिशत राज्य सरकार द्वारा वहन की जाती है। कुछ वित्तीय स्वीकृतियों में देरी के कारण भुगतान अटका रहा, लेकिन सरकार का दावा है कि जल्द ही लंबित किस्तें जारी कर दी जाएंगी।
जमीनी हकीकत
विपक्ष का आरोप है कि कई गरीब परिवारों ने सरकारी आश्वासन पर अपने पुराने मकान तोड़ दिए, लेकिन समय पर अगली किस्त नहीं मिलने से वे संकट में आ गए। वहीं सरकार का कहना है कि योजना को व्यवस्थित ढंग से लागू किया जाएगा ताकि किसी लाभार्थी को अधर में न रहना पड़े। अगर निर्धारित समय में फंड जारी हो जाता है, तो करीब 12 लाख परिवारों के पक्के घर का रास्ता साफ हो सकता है।

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