सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 68,236 राज्यकर्मियों ने शनिवार रात तक अपनी संपत्ति का विवरण अपलोड नहीं किया। इन कर्मचारियों में तृतीय श्रेणी के 34,926, चतुर्थ श्रेणी के 22,624, द्वितीय श्रेणी के 7,204, प्रथम श्रेणी के 2,628 अधिकारी और अन्य श्रेणी के 854 कर्मचारी शामिल हैं।
सरकार का रुख सख्त
मुख्य सचिव एसपी गोयल के आदेश पर यह कदम उठाया गया है। भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति के तहत सभी विभागों को निर्देश दिए गए थे कि 31 जनवरी तक संपत्ति का विवरण अपलोड न करने वाले कर्मचारियों का वेतन रोका जाए।
उत्तर प्रदेश सरकारी कर्मचारी आचरण नियमावली, 1956 के नियम-24 के तहत यह निर्देश आवश्यक था। प्रदेश के कुल 8,66,261 राज्यकर्मी से 2025 तक की संपत्ति का विवरण मांगा गया था। लेकिन 68,236 राज्यकर्मियों ने शनिवार रात तक अपनी संपत्ति नहीं बताई।
कौन है प्रभावित
संपत्ति का विवरण न देने वाले अधिकांश कर्मचारी तृतीय और चतुर्थ श्रेणी में हैं, लेकिन इसमें उच्च श्रेणी के अधिकारी भी शामिल हैं। सरकार ने चेतावनी दी है कि नोडल अधिकारी और आहरण-वितरण अधिकारी वेतन रोके जाने वाले कर्मचारियों के मामले में सख्ती बरतेंगे।

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