मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि प्रत्येक जिले में न्यूनतम 50 एकड़ जमीन चिन्हित कर इन जोनों का चरणबद्ध विकास किया जाए। उनका लक्ष्य है कि इन जोनों में कौशल प्रशिक्षण, रोजगार और उद्यमिता के अवसर एक ही परिसर में उपलब्ध हों।
एम्प्लॉयमेंट एंड इंडस्ट्रियल जोन में क्या मिलेगा
बैठक में अधिकारियों ने बताया कि इन जोनों में निम्नलिखित सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी:
प्लग एंड प्ले यूनिट और फ्लैटेड फैक्ट्री
डिस्प्ले एवं डिजाइन सेंटर और टूल रूम
कॉमन फैसिलिटी सेंटर और टेस्टिंग फैसिलिटी
उद्यमिता प्रशिक्षण, कौशल उन्नयन और मार्गदर्शन
ईटीपी और सीईटीपी (एनवायरनमेंटल मैनेजमेंट सुविधाएं)
ऋण योजनाओं की जानकारी और रोजगार के लिए इंटर्नशिप व अप्रेंटिसशिप
इन सुविधाओं का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि युवाओं और नवउद्यमियों को प्रारंभ से ही आवश्यक अवसंरचना और समर्थन उपलब्ध हो।
रोजगार और उद्यमिता का नया मॉडल
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस पहल से प्रदेश में औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन का प्रभावी मॉडल तैयार होगा। एम्प्लॉयमेंट एंड इंडस्ट्रियल जोन में स्वरोजगार, प्रशिक्षण, अप्रेंटिसशिप और उद्योग आधारित वेतन-आधारित रोजगार की व्यवस्था की जाएगी। इसका लक्ष्य है कि युवाओं को उनकी क्षमता के अनुसार अच्छा वेतन और अवसर मिलें।
साथ ही, योजना का क्रियान्वयन स्थानीय आवश्यकताओं और क्षेत्रीय संभावनाओं के अनुरूप किया जाएगा, ताकि उद्योग, कौशल विकास और रोजगार का एकीकृत प्लेटफॉर्म तैयार हो। दरअसल, हर जिले में स्थापित ये जोन प्रदेश को औद्योगिक और आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में मदद करेंगे और युवाओं को अपने करियर और स्वरोजगार के लिए नए अवसर प्रदान करेंगे।

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