इसके साथ ही 11 जुलाई से 31 जुलाई तक दस्तक अभियान भी संचालित किया जाएगा। इन अभियानों के जरिए लोगों को बीमारियों से बचाव, समय पर पहचान और इलाज की सुविधा उपलब्ध कराने पर जोर दिया जाएगा।
प्रदेशभर में ई-कवच पोर्टल से होगी मरीजों की निगरानी
स्वास्थ्य विभाग ने संचारी रोगों के लक्षण वाले मरीजों की डिजिटल निगरानी के निर्देश दिए हैं। इसके लिए ई-कवच पोर्टल का इस्तेमाल किया जाएगा। अभियान के दौरान अगर किसी व्यक्ति में बीमारी के लक्षण मिलते हैं तो उसकी जानकारी पोर्टल पर दर्ज की जाएगी, जिससे मरीजों की पहचान और इलाज की प्रक्रिया तेज हो सके।
घर-घर जाकर लोगों को जागरूक करेंगे स्वास्थ्यकर्मी
दस्तक अभियान के तहत आशा कार्यकर्ता, एएनएम और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता घर-घर जाकर लोगों को जागरूक करेंगे। इस दौरान क्षय रोग, कुष्ठ रोग, फाइलेरिया और काला आजार जैसी बीमारियों के लक्षणों की जानकारी दी जाएगी। संदिग्ध मरीजों की पहचान कर उनका विवरण स्वास्थ्य विभाग तक पहुंचाया जाएगा।
मच्छर जनित बीमारियों पर रहेगा विशेष फोकस
अधिक जोखिम वाले क्षेत्रों में मच्छर नियंत्रण और वेक्टर नियंत्रण गतिविधियां तेज की जाएंगी। स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिलों को माइक्रो प्लान तैयार करने के निर्देश दिए हैं, ताकि अभियान को प्रभावी तरीके से चलाया जा सके।
आशा और एएनएम को दिए गए खास निर्देश
अभियान को सफल बनाने के लिए फ्रंटलाइन वर्कर्स का प्रशिक्षण पूरा कराया जाएगा। आशा और एएनएम को अपने साथ ओआरएस और जिंक की गोलियां रखने के निर्देश दिए गए हैं। इसका उद्देश्य दस्त और अन्य लक्षण वाले मरीजों को तुरंत प्राथमिक सहायता उपलब्ध कराना है।
खाने-पीने की चीजों पर भी होगी निगरानी
खाद्य सुरक्षा विभाग को भी अभियान के दौरान सक्रिय रहने के निर्देश दिए गए हैं। खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थों, खराब फल-सब्जियों और अस्वच्छ तरीके से तैयार किए जा रहे जूस आदि की बिक्री पर नजर रखी जाएगी। असुरक्षित और खराब गुणवत्ता वाले खाद्य पदार्थों पर कार्रवाई की जाएगी।
स्कूलों में भी चलेंगी जागरूकता गतिविधियां
अभियान के तहत स्कूलों में बच्चों को स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़ी जानकारी दी जाएगी। जानवरों के काटने की स्थिति में प्राथमिक उपचार के तौर पर घाव को साफ पानी से धोने जैसी जरूरी बातों को बच्चों को समझाया जाएगा। इसके लिए जागरूकता कार्यक्रम और प्रतियोगिताएं भी कराई जाएंगी।
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