जुलाई से शुरू होगी समिति गठन की प्रक्रिया
शिक्षा विभाग के निर्देश के अनुसार शैक्षणिक सत्र शुरू होने के एक महीने के अंदर एसएमसी का गठन किया जाना था, लेकिन प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी थी। अब 1 जुलाई से राजकीय माध्यमिक विद्यालय खुलने के बाद समिति बनाने की प्रक्रिया तेज की जाएगी। अधिकारियों को इसके लिए जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं।
अभिभावकों को मिलेगा 75 प्रतिशत प्रतिनिधित्व
नई व्यवस्था की सबसे खास बात यह है कि विद्यालय प्रबंध समिति में 75 प्रतिशत सदस्य विद्यार्थियों के माता-पिता या संरक्षक होंगे। बाकी 25 प्रतिशत सदस्यों में स्थानीय निकाय के प्रतिनिधि, शिक्षाविद, विषय विशेषज्ञ, पूर्व विद्यार्थी और वंचित वर्ग के प्रतिनिधियों को शामिल किया जाएगा। इससे स्कूल से जुड़े फैसलों में अभिभावकों की भूमिका पहले से ज्यादा मजबूत होगी।
छात्रों की संख्या के आधार पर तय होगी समिति
विद्यालय में नामांकित विद्यार्थियों की संख्या के अनुसार समिति का आकार तय किया जाएगा। 100 तक विद्यार्थियों वाले स्कूलों में 15 सदस्य होंगे। 101 से 500 विद्यार्थियों वाले विद्यालयों में 20 सदस्य होंगे। 500 से अधिक छात्रों वाले स्कूलों में 25 सदस्यीय समिति बनाई जाएगी।
महिलाओं को मिलेगा 50 प्रतिशत प्रतिनिधित्व
समिति में महिलाओं की भागीदारी को भी प्राथमिकता दी गई है। कुल सदस्यों में कम से कम 50 प्रतिशत स्थान महिलाओं के लिए रहेगा। वहीं समिति का अध्यक्ष किसी अभिभावक को बनाया जाएगा। समिति का कार्यकाल दो साल का होगा।
बनाई जाएंगी अलग-अलग उप समितियां
विद्यालय प्रबंध समिति के अंतर्गत भवन निर्माण उप समिति और शैक्षणिक उप समिति का भी गठन किया जाएगा। इन समितियों में भी अभिभावकों की भागीदारी रखी जाएगी, ताकि स्कूल के विकास कार्यों और पढ़ाई से जुड़े मामलों पर बेहतर निगरानी हो सके। सरकार की इस पहल से उम्मीद है कि स्कूलों में विद्यार्थियों की उपस्थिति बढ़ेगी और पढ़ाई के माहौल में सुधार आएगा।

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