HRA को 40% तक करने की मांग
कई कर्मचारी संगठनों ने 8वें वेतन आयोग के सामने HRA में बड़ी बढ़ोतरी का प्रस्ताव रखा है। खासतौर पर बड़े शहरों यानी X श्रेणी के शहरों में HRA को 40 प्रतिशत तक करने की मांग की जा रही है। कर्मचारियों का तर्क है कि दिल्ली, मुंबई जैसे महानगरों में मकान का किराया काफी बढ़ चुका है, जिससे वर्तमान HRA से खर्च पूरा करना मुश्किल हो रहा है।
अभी कितना मिलता है HRA?
फिलहाल केंद्रीय कर्मचारियों को शहरों की श्रेणी के हिसाब से HRA दिया जाता है। X श्रेणी के शहरों में 30 प्रतिशत HRA, Y श्रेणी के शहरों में 20 प्रतिशत HRA, Z श्रेणी के शहरों में 10 प्रतिशत HRA, ये दरें महंगाई भत्ते (DA) में बदलाव के बाद संशोधित की गई थीं।
कर्मचारी संगठनों की अलग-अलग मांगें
कई संगठनों ने HRA बढ़ाने के लिए अलग-अलग सुझाव दिए हैं। कुछ संगठनों ने X श्रेणी के शहरों के लिए 36%, Y श्रेणी के लिए 24% और Z श्रेणी के लिए 12% HRA की मांग रखी है। वहीं कुछ कर्मचारी संगठन चाहते हैं कि बड़े शहरों में HRA 40% तक किया जाए और भविष्य में DA बढ़ने के साथ HRA में भी बदलाव की व्यवस्था हो।
HRA बढ़ने से कैसे होगा फायदा?
अगर सरकार कर्मचारी संगठनों की मांगों पर विचार करती है और HRA में बढ़ोतरी होती है तो इसका सीधा असर कर्मचारियों की मासिक आय पर पड़ेगा। HRA बढ़ने से खासतौर पर उन कर्मचारियों को ज्यादा लाभ मिलेगा जो बड़े शहरों में किराये के मकान में रहते हैं। इससे उनकी कुल सैलरी में इजाफा हो सकता है।
DA से जोड़ने की भी उठी मांग
कुछ संगठनों ने यह सुझाव भी दिया है कि HRA को महंगाई भत्ते से जोड़ा जाए, ताकि भविष्य में महंगाई बढ़ने पर कर्मचारियों को अपने आप राहत मिल सके। इस व्यवस्था से कर्मचारियों की क्रय शक्ति बनाए रखने में मदद मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
8वें वेतन आयोग में अहम मुद्दा बन सकता है HRA
8वें वेतन आयोग के सामने HRA बढ़ोतरी का मुद्दा लगातार चर्चा में है। हालांकि अंतिम फैसला सरकार और आयोग की सिफारिशों के आधार पर ही होगा। अगर HRA में कर्मचारियों की मांग के अनुसार बदलाव होता है तो केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी में बड़ा असर देखने को मिल सकता है।

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