कृषि मंत्री ने किया एलान, बिहारवासियों के लिए बड़ी खुशखबरी

पटना। बिहार सरकार खेती को अधिक वैज्ञानिक, सुरक्षित और टिकाऊ बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। राज्य के 550 से अधिक उच्च विद्यालयों में मिट्टी जांच प्रयोगशालाएं स्थापित करने की घोषणा की गई है। इस पहल का उद्देश्य किसानों को अपने खेत की मिट्टी की गुणवत्ता की आसानी से जांच कराने की सुविधा उपलब्ध कराना है, ताकि वे फसलों की जरूरत के अनुसार उर्वरकों और कीटनाशकों का संतुलित उपयोग कर सकें।

यह घोषणा राज्य के कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने विधानसभा में की। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों के अधिकांश उच्च विद्यालयों में पढ़ने वाले छात्र किसान परिवारों से आते हैं। ऐसे में स्कूलों में प्रयोगशालाएं बनने से किसानों और विद्यार्थियों दोनों को इसका सीधा लाभ मिलेगा।

वैज्ञानिक खेती को मिलेगा बढ़ावा

मिट्टी जांच के जरिए किसानों को यह जानकारी मिल सकेगी कि उनकी जमीन में किन पोषक तत्वों की कमी या अधिकता है। इसके आधार पर वे आवश्यकता के अनुसार ही खाद और रसायनों का उपयोग करेंगे। इससे खेती की लागत कम होने के साथ-साथ फसलों की गुणवत्ता में भी सुधार आने की उम्मीद है।

जैविक और प्राकृतिक खेती पर जोर

राज्य सरकार किसानों को प्राकृतिक और जैविक खेती अपनाने के लिए भी लगातार प्रोत्साहित कर रही है। सरकार चाहती है कि किसान अपनी खेती योग्य भूमि के एक हिस्से पर रसायन मुक्त खेती करें, ताकि सुरक्षित और स्वास्थ्यवर्धक खाद्यान्न का उत्पादन बढ़ सके। इसके लिए किसानों को प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन और विभिन्न योजनाओं के माध्यम से सहायता देने की तैयारी की जा रही है।

किसानों को प्रशिक्षण और तकनीकी सहयोग

सरकार कृषि से जुड़े विभिन्न विभागों के समन्वय से एक व्यापक योजना तैयार करेगी। इसके तहत किसानों को आधुनिक खेती, मिट्टी संरक्षण, जैविक कृषि और उर्वरकों के संतुलित उपयोग का प्रशिक्षण दिया जाएगा। साथ ही जिला और प्रखंड स्तर पर जागरूकता अभियान चलाकर अधिक से अधिक किसानों को वैज्ञानिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा।

खेती को आधुनिक बनाने की दिशा में अहम पहल

बिहार में पहले से हजारों हेक्टेयर क्षेत्र में जैविक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। अब स्कूलों में मिट्टी जांच प्रयोगशालाएं स्थापित होने से खेती और शिक्षा के बीच बेहतर तालमेल बनेगा। विद्यार्थी भी कृषि विज्ञान की व्यावहारिक जानकारी प्राप्त कर सकेंगे, जबकि किसानों को अपने गांव के नजदीक ही मिट्टी परीक्षण की सुविधा मिलेगी।

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