किन फंडों पर लागू होगी 7.1% ब्याज दर?
वित्त मंत्रालय के अनुसार, 7.1 प्रतिशत की यह ब्याज दर केवल जनरल प्रोविडेंट फंड (GPF) तक सीमित नहीं रहेगी। इसका लाभ कॉन्ट्रिब्यूटरी प्रोविडेंट फंड (CPF), ऑल इंडिया सर्विसेज प्रोविडेंट फंड तथा सरकार द्वारा संचालित अन्य समान प्रोविडेंट फंड के खाताधारकों को भी मिलेगा। इससे विभिन्न सरकारी विभागों में कार्यरत कर्मचारियों को समान दर पर ब्याज का लाभ मिलता रहेगा।
क्या होता है GPF?
जनरल प्रोविडेंट फंड सरकारी कर्मचारियों के लिए बनाई गई एक दीर्घकालिक बचत योजना है। इसमें कर्मचारी अपने वेतन का एक हिस्सा नियमित रूप से जमा करते हैं। सेवा अवधि पूरी होने या सेवानिवृत्ति के समय कर्मचारियों को जमा मूलधन के साथ ब्याज सहित पूरी राशि प्राप्त होती है। यही कारण है कि GPF को सरकारी कर्मचारियों की वित्तीय सुरक्षा का महत्वपूर्ण आधार माना जाता है।
हर तिमाही ब्याज दरों की समीक्षा
केंद्र सरकार प्रत्येक तिमाही में GPF और अन्य छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरों की समीक्षा करती है। हालांकि इस बार जुलाई-सितंबर 2026 तिमाही के लिए सरकार ने ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है। इसी अवधि के लिए PPF, सुकन्या समृद्धि योजना, वरिष्ठ नागरिक बचत योजना (SCSS) और राष्ट्रीय बचत प्रमाणपत्र (NSC) जैसी छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरें भी पहले की तरह बरकरार रखी गई हैं।
EPF की ब्याज दर अलग
संगठित निजी क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए संचालित कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) की ब्याज दर GPF से अलग होती है। वर्तमान में EPF पर 8.25 प्रतिशत ब्याज दिया जा रहा है। यह दर वित्त वर्ष 2023-24 में संशोधित की गई थी और फिलहाल उसी के अनुसार लागू है।
कर्मचारियों के लिए क्या मायने रखता है यह फैसला?
GPF की ब्याज दर को 7.1 प्रतिशत पर बनाए रखने से सरकारी कर्मचारियों की दीर्घकालिक बचत पर स्थिर रिटर्न मिलता रहेगा। जिन कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति निकट है, उनके लिए यह निर्णय विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि उनकी रिटायरमेंट कॉर्पस पर ब्याज का सीधा प्रभाव पड़ता है।

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