रेल कर्मचारियों को तोहफा, सरकार ने दी एक बड़ी खुशखबरी

नई दिल्ली। भारतीय रेलवे ने अपने गैर-राजपत्रित (नॉन-गेजटेड) कर्मचारियों को बड़ी राहत देने वाला अहम फैसला लिया है। नई ट्रांसफर नीति के तहत अब लंबे समय से अपने गृह जिले, पसंदीदा मंडल या परिवार के नजदीक स्थानांतरण का इंतजार कर रहे कर्मचारियों की प्रक्रिया पहले की तुलना में कहीं अधिक आसान और पारदर्शी होगी। खासतौर पर 20 वर्ष या उससे अधिक नियमित सेवा पूरी कर चुके कर्मचारियों को इस व्यवस्था में सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।

20 वर्ष की सेवा वालों को मिलेगी पहली प्राथमिकता

नई व्यवस्था के अनुसार, जिन गैर-राजपत्रित रेल कर्मचारियों ने 20 वर्ष या उससे अधिक की नियमित सेवा पूरी कर ली है और वे स्वयं के अनुरोध पर स्थानांतरण चाहते हैं, उन्हें प्राथमिकता सूची में सबसे ऊपर रखा जाएगा। इससे वर्षों से अपने परिवार के पास आने की प्रतीक्षा कर रहे कर्मचारियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

अब HRMS पोर्टल से होगा ऑटो ट्रांसफर

नई नीति की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि पूरी प्रक्रिया मानव संसाधन प्रबंधन प्रणाली (HRMS) के माध्यम से डिजिटल तरीके से संचालित होगी। कर्मचारी ऑनलाइन आवेदन करेंगे और हर महीने की पहली तारीख को पोर्टल स्वतः पात्र कर्मचारियों की प्राथमिकता सूची तैयार करेगा। सूची में स्थान कर्मचारियों की नियमित सेवा अवधि के आधार पर तय होगा। जिसने सबसे अधिक वर्षों तक सेवा की होगी, उसे प्राथमिकता भी सबसे पहले मिलेगी।

NOC की बाध्यता लगभग खत्म

पहले स्थानांतरण प्रक्रिया में सबसे बड़ी समस्या अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) प्राप्त करना होती थी। कई मामलों में इसी कारण कर्मचारियों के आवेदन वर्षों तक लंबित रहते थे। नई व्यवस्था में जैसे ही संबंधित इकाई में रिक्त पद उपलब्ध होगा, HRMS पोर्टल के माध्यम से स्वतः स्थानांतरण आदेश जारी किया जाएगा। इस प्रक्रिया में अलग से NOC का इंतजार नहीं करना पड़ेगा, जिससे ट्रांसफर प्रक्रिया काफी तेज हो जाएगी।

15 दिनों के भीतर होगा कार्यमुक्त

रेलवे बोर्ड ने कार्यमुक्त करने की समय-सीमा भी तय कर दी है। ऑटो ट्रांसफर आदेश जारी होने के बाद संबंधित अधिकारी को 15 दिनों के भीतर कर्मचारी को कार्यमुक्त करना होगा। यदि किसी कर्मचारी के खिलाफ विभागीय जांच, सतर्कता (विजिलेंस) का मामला लंबित हो या सरकारी संपत्ति का हस्तांतरण पूरा न हुआ हो, तभी विशेष परिस्थितियों में कार्यमुक्ति रोकी जा सकेगी।

DRM को ही रोकने का अधिकार

नई नीति में यह भी स्पष्ट किया गया है कि स्थानांतरण को रोकने का अधिकार केवल मंडल रेल प्रबंधक (DRM) के पास होगा। यदि किसी विशेष कारण से ट्रांसफर रोका भी जाता है, तो यह अवधि अधिकतम एक माह से अधिक नहीं होगी। इसके बाद स्थानांतरण आदेश को लागू करना अनिवार्य होगा।

दो महीने में पूरी तरह लागू होगी नई प्रणाली

रेलवे बोर्ड ने सभी जोनल रेलवे और उत्पादन इकाइयों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने HRMS डाटा, रिक्त पदों और कर्मचारियों की सेवा संबंधी जानकारी को अपडेट करें। परिपत्र जारी होने के लगभग दो महीने बाद ऑटो ट्रांसफर मॉड्यूल पूरी तरह से लागू कर दिया जाएगा।

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