क्या है फिटमेंट फैक्टर?
फिटमेंट फैक्टर वह गुणांक है, जिससे मौजूदा बेसिक वेतन को गुणा करके नया बेसिक वेतन तय किया जाता है। उदाहरण के लिए यदि किसी कर्मचारी की मौजूदा बेसिक सैलरी 18,000 रुपये है और फिटमेंट फैक्टर 2.25 तय होता है, तो नई बेसिक सैलरी लगभग 40,500 रुपये (18,000 × 2.25) हो सकती है। हालांकि इसका अर्थ यह नहीं है कि कर्मचारी की कुल मासिक सैलरी भी 2.25 गुना हो जाएगी, क्योंकि कुल वेतन में DA, HRA और अन्य भत्ते भी शामिल होते हैं।
कर्मचारी संगठनों की क्या मांग है?
नेशनल काउंसिल-जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM) ने 8वें वेतन आयोग के लिए 3.83 फिटमेंट फैक्टर की मांग की है। वहीं कई वेतन विशेषज्ञों का अनुमान है कि आयोग 2.00 से 2.25 के बीच फिटमेंट फैक्टर की सिफारिश कर सकता है। हालांकि अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक फैसला नहीं हुआ है।
पिछले वेतन आयोगों के आंकड़े क्या बताते हैं?
अगर पिछले चार वेतन आयोगों पर नजर डालें तो साफ पता चलता है कि बड़ा फिटमेंट फैक्टर हमेशा बड़ी सैलरी वृद्धि की गारंटी नहीं रहा। 7वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 2.57 था, लेकिन औसत ग्रॉस सैलरी वृद्धि केवल 14.29% रही। दूसरी ओर 6वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर केवल 1.86 था, फिर भी कर्मचारियों की ग्रॉस सैलरी में लगभग 54% की बढ़ोतरी हुई।
आखिर DA कैसे बदल देता है पूरा गणित?
जब 7वां वेतन आयोग लागू हुआ, तब कर्मचारियों को 125% DA मिल रहा था। नए वेतनमान में इस DA को बेसिक वेतन में समाहित कर दिया गया। यानी कर्मचारियों को पहले से ही बड़ा लाभ मिल चुका था। इसलिए 2.57 फिटमेंट फैक्टर दिखने के बावजूद वास्तविक वेतन वृद्धि सीमित रही। इसके विपरीत 6वें वेतन आयोग के समय DA केवल 24% था। इसलिए नए वेतनमान में अधिक वास्तविक बढ़ोतरी दिखाई दी और कर्मचारियों की ग्रॉस सैलरी में करीब 54% की वृद्धि दर्ज हुई।
8वें वेतन आयोग में कितनी बढ़ सकती है सैलरी?
विभिन्न वित्तीय अनुमानों के अनुसार यदि फिटमेंट फैक्टर 2.00 से 2.57 के बीच तय होता है, तो अलग-अलग वेतन स्तर के कर्मचारियों की ग्रॉस सैलरी में लगभग 31% से 68% तक की वृद्धि संभव मानी जा रही है। हालांकि यह केवल संभावित आकलन है। वास्तविक वृद्धि इस बात पर निर्भर करेगी कि आयोग DA, HRA और अन्य भत्तों को किस प्रकार शामिल करता है।
किन-किन घटकों से बनती है कर्मचारियों की कुल सैलरी?
केंद्रीय कर्मचारियों की मासिक आय केवल बेसिक पे से तय नहीं होती। इसमें कई अन्य भत्ते भी शामिल होते हैं, जैसे, बेसिक पे, महंगाई भत्ता (DA), मकान किराया भत्ता (HRA), परिवहन भत्ता, पद और कार्य के अनुसार मिलने वाले अन्य विशेष भत्ते। यही कारण है कि समान बेसिक वेतन वाले दो कर्मचारियों की कुल सैलरी अलग-अलग हो सकती है।

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