यह आंकड़ा ऐसे समय आया है जब रूस से तेल खरीदने को लेकर अमेरिका की ओर से लगातार दबाव बनाया जा रहा है। इसके बावजूद भारत ने सस्ता रूसी तेल खरीदना जारी रखा है।
तेजी से बदला तेल आयात
भारत की तेल खरीद में पिछले कुछ वर्षों में बड़ा बदलाव हुआ है। 2022 में भारत के कुल तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी करीब 15 फीसदी थी। 2025-26 में यह बढ़कर लगभग 30 फीसदी हुई और जुलाई 2026 में 52 फीसदी के आसपास पहुंच गई। इसके उलट सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात समेत खाड़ी देशों से भारत की तेल खरीद का हिस्सा घटा है। 2022 में इन देशों की संयुक्त हिस्सेदारी 55 फीसदी से अधिक थी, जो अब 30 फीसदी से नीचे आ गई है।
सस्ता तेल बना बड़ी वजह
रूस से भारत की बढ़ती तेल खरीद के पीछे कीमत एक अहम कारण मानी जा रही है। रूस से मिलने वाला कच्चा तेल कई मौकों पर दूसरे स्रोतों की तुलना में प्रतिस्पर्धी कीमत पर उपलब्ध रहा है। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए सस्ती खरीद से आयात बिल को नियंत्रित रखने में मदद मिलती है। इसके अलावा पश्चिम एशिया में तनाव और समुद्री व्यापार मार्गों से जुड़ी अनिश्चितताओं ने भी भारत की तेल खरीद रणनीति को प्रभावित किया है।
अमेरिका की आपत्ति क्यों?
रूस से भारत की बढ़ती तेल खरीद अमेरिका के लिए चिंता का विषय है। अमेरिका रूस की ऊर्जा आय को कम करने के लिए उस पर दबाव बनाए हुए है। इसी बीच रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर अतिरिक्त शुल्क या अन्य आर्थिक कार्रवाई की संभावनाओं को लेकर चर्चा तेज हुई है।

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