डेढ़ महीने चलेगा विशेष अभियान
विभाग का यह अभियान करीब डेढ़ महीने तक चलने वाला है। इसका मुख्य मकसद पुराने और लंबित भूमि रिकॉर्ड को व्यवस्थित करना और कागजात में मौजूद गड़बड़ियों को दूर करना है। खासतौर पर उन मामलों पर ध्यान दिया जाएगा, जिनमें जमीन मालिक की मृत्यु के बाद उनके वारिसों के नाम जमाबंदी में दर्ज नहीं हो सके हैं।
आपको बता दें की जमीन के ऐसे मामलों के लंबित रहने से परिवारों को जमीन के अधिकार से जुड़े कामों में लोगों को काफी परेशानी होती है। सरकार के द्वारा अब इस अभियान के दौरान इन उत्तराधिकार संबंधी मामलों को तेजी से निपटाने की कोशिश की जाएगी।
जमीन मालिकों को क्या फायदा होगा?
जमाबंदी और नामांतरण के रिकॉर्ड दुरुस्त होने से लोगों को पैतृक जमीन अपने नाम कराने में राहत मिल सकती है। सही रिकॉर्ड होने पर जमीन की खरीद-बिक्री और बंटवारे के दौरान विवाद की स्थिति कम होगी। वहीं, लंबित मापी और नक्शे से जुड़े काम पूरे होने पर भूमि विवादों के निपटारे में भी मदद मिलने की उम्मीद है। इस अभियान से भू-धारियों को राजस्व कार्यालयों के बार-बार चक्कर लगाने से भी राहत मिलने की संभावना है।
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