चार देशों की ताकत
अमेरिका: अमेरिका ने दुनिया में सबसे पहले ASAT क्षमता विकसित की थी। अमेरिकी मिसाइलें उच्च-सटीक और तेज़ गति वाली हैं, जो लो-ऑर्थ और मिड-ऑर्थ उपग्रहों को निशाना बना सकती हैं। उनका उद्देश्य अंतरिक्ष निगरानी और रक्षा के साथ रणनीतिक संतुलन बनाए रखना है।
रूस: रूस के पास भी अत्याधुनिक ASAT मिसाइलें हैं। रूस ने इस क्षेत्र में लंबे समय से अनुसंधान और विकास किया है और उनकी मिसाइलें अंतरिक्ष में उच्च ऊंचाई तक उपग्रहों को निष्क्रिय करने में सक्षम हैं। रूस की तकनीक में उच्च-सटीक लक्ष्य साधन और लंबे रेंज की मारक क्षमता शामिल है।
चीन: चीन ने 2007 में पहली बार सफलतापूर्वक एक लो-एर्थ ऑर्बिट उपग्रह को मार गिराया था। उनकी मिसाइलें लंबी दूरी और हाई-स्पीड लक्ष्यों को आसानी से ट्रैक कर सकती हैं। चीन की ASAT तकनीक अब दुनिया में खतरनाक और चुनौतीपूर्ण मानी जाती है।
भारत: भारत ने 2019 में मिशन शक्ति के तहत अपनी ASAT क्षमता का सफल परीक्षण किया। अब DRDO द्वारा विकसित नई मिसाइलें भारतीय वायुसेना और रक्षा बलों के लिए ऑपरेशनल स्तर पर तैयार हैं। भारत की यह मिसाइल अंतरिक्ष में 300 से 1200 किलोमीटर ऊँचाई तक निशाना साध सकती है और उच्च-सटीक गाइडेंस सिस्टम के साथ काम करती है।
भारत की ताकत और महत्व
यह मिसाइल भारत को अंतरिक्ष में रणनीतिक मजबूती देती है। किसी भी आकस्मिक खतरे के समय भारत को तेज़ प्रतिक्रिया का मौका मिलता है। यह दुनिया को दिखाती है कि भारत अब अंतरिक्ष में आत्मनिर्भर और सक्षम बड़ी ताकत है।

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