बिहार में नहीं होगी शिक्षक पात्रता परीक्षा: भर्ती प्रक्रिया में बड़ा बदलाव

पटना। बिहार में प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षक बनने की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया गया है। राज्य सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि अब अलग से राज्य स्तरीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) आयोजित नहीं की जाएगी। इसके बजाय अभ्यर्थियों को केंद्रीय स्तर की पात्रता परीक्षा के जरिए ही आगे बढ़ना होगा।

सीटेट पास करना अनिवार्य

नई व्यवस्था के तहत केवल वे उम्मीदवार शिक्षक भर्ती के लिए आवेदन कर सकेंगे, जिन्होंने Central Teacher Eligibility Test (सीटेट) उत्तीर्ण किया हो। यह परीक्षा सीबीएसई द्वारा आयोजित की जाती है और पूरे देश में मान्य है। शिक्षा विभाग का मानना है कि सीटेट के जरिए पर्याप्त योग्य अभ्यर्थी मिल रहे हैं, इसलिए अलग से राज्य परीक्षा कराने की आवश्यकता नहीं है।

पहले दो बार हुई थी राज्य टीईटी

बिहार में राज्य स्तरीय टीईटी का आयोजन अब तक सिर्फ दो मौकों पर हुआ था 2011 और 2017 में। यह परीक्षा Bihar School Examination Board द्वारा कराई गई थी। उस समय कक्षा 1 से 5 और 6 से 8 तक पढ़ाने के लिए अलग-अलग पेपर आयोजित किए जाते थे।

पात्रता और अंक प्रणाली में अंतर

राज्य टीईटी और सीटेट के बीच कई महत्वपूर्ण अंतर रहे हैं। सीटेट में कुल 150 प्रश्न होते हैं और सामान्य वर्ग के लिए 60% अंक जरूरी होते हैं। आरक्षित वर्ग को कुछ छूट दी जाती है। वहीं राज्य टीईटी में उत्तीर्णांक की शर्तें अपेक्षाकृत अलग थीं और स्थानीय अभ्यर्थियों को पाठ्यक्रम के स्तर पर सुविधा मिलती थी।

सिलेबस बना चिंता का विषय

सबसे बड़ी चिंता पाठ्यक्रम को लेकर है। राज्य टीईटी का ढांचा स्थानीय शैक्षणिक ढांचे के अनुरूप था, जबकि सीटेट राष्ट्रीय स्तर के पाठ्यक्रम पर आधारित है। इससे उन छात्रों को अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ेगी, जो अब तक राज्य पैटर्न के अनुसार तैयारी कर रहे थे।

अभ्यर्थियों पर संभावित असर

इस निर्णय से भर्ती प्रक्रिया अधिक केंद्रीकृत हो जाएगी, लेकिन राज्य के युवाओं को राष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ेगा। खासकर ग्रामीण और क्षेत्रीय पृष्ठभूमि से आने वाले अभ्यर्थियों के लिए यह बदलाव चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है। अब बिहार में शिक्षक बनने की पहली सीढ़ी सीटेट होगी, और राज्य स्तर की टीईटी फिलहाल इतिहास का हिस्सा बन गई है।

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