24 जुलाई 2025 को हुआ था हस्ताक्षर
भारत और United Kingdom ने 24 जुलाई 2025 को व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते Comprehensive Economic and Trade Agreement (CETA) पर हस्ताक्षर किए थे। इस समझौते का मकसद दोनों अर्थव्यवस्थाओं के बीच व्यापार को तेज़ी से बढ़ाना और बाजारों तक बेहतर पहुंच सुनिश्चित करना है। उम्मीद है कि यह समझौता अप्रैल से लागू हो जाएगा, हालांकि इसके लिए दोनों देशों की विधायी मंजूरी जरूरी है।
99% भारतीय निर्यात को मिलेगा बड़ा लाभ
CETA के तहत लगभग 99 प्रतिशत भारतीय निर्यात को ब्रिटिश बाजार में शून्य शुल्क (ज़ीरो ड्यूटी) का लाभ मिलेगा। इससे खासतौर पर टेक्सटाइल, फुटवियर, जेम्स एंड ज्वेलरी, स्पोर्ट्स गुड्स और खिलौना उद्योग को मजबूती मिलने की उम्मीद है। दूसरी ओर, भारत अपने बाजार को कुछ ब्रिटिश उत्पादों के लिए चरणबद्ध तरीके से खोलेगा। चॉकलेट, बिस्कुट और कॉस्मेटिक जैसे कई उपभोक्ता उत्पादों पर टैरिफ में कटौती से भारतीय ग्राहकों को भी राहत मिल सकती है।
स्कॉच व्हिस्की और कारों पर घटेगा टैरिफ
समझौते के लागू होते ही स्कॉच व्हिस्की पर आयात शुल्क 150 प्रतिशत से घटाकर 75 प्रतिशत कर दिया जाएगा। आगे चलकर 2035 तक इसे 40 प्रतिशत तक लाने की योजना है। ऑटोमोबाइल सेक्टर में भी बड़ा बदलाव प्रस्तावित है। वर्तमान में लगभग 110 प्रतिशत की आयात ड्यूटी को पांच वर्षों में घटाकर 10 प्रतिशत तक लाया जाएगा, वह भी एक निर्धारित कोटा प्रणाली के तहत। बदले में भारतीय निर्माताओं को इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड वाहनों के लिए ब्रिटिश बाजार में बेहतर पहुंच मिलेगी।
हालांकि अभी संसद और कैबिनेट की मंजूरी जरूरी
समझौते को लागू करने से पहले ब्रिटेन की संसद House of Commons और House of Lords में बहस और समीक्षा की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। ब्रिटेन के बिजनेस और ट्रेड डिपार्टमेंट में राज्य मंत्री Chris Bryant ने इसे लेबर सरकार की बड़ी उपलब्धि बताया है और कहा है कि यह समझौता ब्रिटिश कारोबारों के लिए नए अवसर खोलेगा। भारत में, ऐसे अंतरराष्ट्रीय समझौतों को लागू करने के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी आवश्यक होती है। दोनों पक्षों की स्वीकृति के बाद, आपसी सहमति से लागू होने की तिथि तय की जाएगी।
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