सुदर्शन चक्र: गोल्डन डोम से भी आगे
विशेषज्ञों के अनुसार, सुदर्शन चक्र एयर डिफेंस नेटवर्क S-400, आकाश एयर डिफेंस, आकाश-NG और कुशा मिसाइल सिस्टम को एकीकृत करेगा। इसका मकसद न केवल मिसाइलों को रोकना है, बल्कि आने वाले किसी भी दुश्मन हमले को समय रहते इंटरसेप्ट करना भी है। यह नेटवर्क सैकड़ों हमलों को एक साथ रोकने में सक्षम होगा और भारत के आस-पास लॉन्च की जाने वाली मिसाइलों की निगरानी करेगा।
एंटी-स्टील्थ तकनीक से J-20 का मुकाबला
IDRW की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय वायुसेना ने सुदर्शन चक्र में एंटी-स्टील्थ तकनीक को शामिल करने की योजना बनाई है। यह तकनीक खासकर चीनी J-20 और आने वाले J-35 स्टील्थ जेट्स के खिलाफ बनाई जा रही है। अधिकारी बताते हैं कि चीन ने 300 से अधिक स्टील्थ विमानों को तैनात कर रखा है और हर साल 80–100 नए विमानों का निर्माण किया जा रहा है। इस स्थिति में भारत का लक्ष्य इन स्टील्थ विमानों को बेअसर करना और उनके हमलों को विफल करना है।
अरुणाचल और लद्दाख में रणनीतिक बढ़त
विशेषज्ञों के अनुसार, सुदर्शन चक्र का फोकस अरुणाचल प्रदेश और लद्दाख के सामने वाले क्षेत्रों में स्टील्थ विमानों की बढ़ती तैनाती पर है। यह सिस्टम रडार क्रॉस-सेक्शन (RCS) कम वाले विमानों को भी पहचान सकेगा और दुश्मन के हमलों को पहले ही इंटरसेप्ट करेगा।
सुदर्शन चक्र और प्रोजेक्ट कुशा का तालमेल
सुदर्शन चक्र DRDO के प्रोजेक्ट कुशा के साथ मिलकर काम करेगा। कुशा लंबी दूरी की मिसाइल प्रणाली (300–400 किमी रेंज) पर आधारित है, जबकि सुदर्शन चक्र सेंसर, बैटल मैनेजमेंट और एंटी-स्टील्थ क्षमताओं का केंद्र होगा। अधिकारी बताते हैं कि यह संयुक्त प्रणाली दुश्मन के स्टील्थ विमानों को ट्रैक करने और समय रहते जवाबी कार्रवाई करने में सक्षम होगी।
स्टील्थ जेट्स के लिए भी अब बचना मुश्किल
सिस्टम के पूरा होने के बाद, चीनी J-20 और भविष्य के J-35 स्टील्थ जेट्स को भारत की सीमा के पास हमले करने में भारी बाधा का सामना करना पड़ेगा। लंबी दूरी की मिसाइलें समय पर सक्रिय होंगी और दुश्मन के विमान या तो पीछे हटेंगे या हथियारों के इस्तेमाल के दौरान आसानी से ट्रैक किए जाएंगे।

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