ग्रामीण कार्य विभाग ने कहा है कि यह कदम ग्रामीण इलाकों में बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं को देखते हुए उठाया गया है। पिछले कुछ वर्षों में ग्रामीण इलाकों में सड़क हादसों की संख्या बढ़कर लगभग चार हजार हो गई है। कुल दुर्घटनाओं में लगभग एक तिहाई ग्रामीण इलाकों में हो रही हैं, जिससे किसानों और ग्रामीणों की सुरक्षा खतरे में पड़ रही थी।
सड़क सुरक्षा में सख्ती और निगरानी
ग्रामीण कार्य विभाग के सचिव दिवेश सेहरा ने सभी इंजीनियरों को निर्देश दिए हैं कि अब निर्माण या मरम्मत होने वाली सड़कों में सभी सड़क सुरक्षा मानकों का पालन किया जाए। इसके लिए स्वतंत्र निगरानी की जाएगी और विभागीय एमआईएस में जेब्रा क्रॉसिंग, गति सीमा संकेत और अन्य सुरक्षा उपायों के लिए अलग कॉलम बनाया जाएगा। सचिव ने यह भी कहा कि शहरों की तरह अब ग्रामीण सड़कों का रखरखाव सात वर्षों तक सुनिश्चित किया जाएगा। इसका मकसद है कि ग्रामीण सड़कें सिर्फ बनें ही नहीं, बल्कि लंबे समय तक सुरक्षित और उपयोगी बनी रहें।
बिहार की ग्रामीण सड़कें और भविष्य की योजना
बिहार में लगभग 1,18,000 किलोमीटर से अधिक ग्रामीण सड़कें हैं। इनमें से कई सड़कें मेला-हाट और प्रखंड मुख्यालय को जोड़ती हैं। विभाग ने अब इन सड़कों को दो लेन में परिवर्तित करने और आधुनिक सुरक्षा मानकों से सजाने का फैसला किया है।
साथ ही, बिहार में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से सड़कों की निगरानी का नया तरीका भी शुरू किया जा रहा है। इससे सड़क की स्थिति, गति सीमा का पालन और सुरक्षा उपायों का क्रियान्वयन लगातार मॉनिटर किया जा सकेगा।

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