छोटे और बड़े बाजारों का बंटवारा
ग्रामीण विकास विभाग के प्रधान सचिव पंकज कुमार ने बताया कि योजना के तहत कुल 447 छोटे हाट और 278 बड़े बाजार बनाए जाएंगे।
छोटी कैटेगरी: छोटे हाटों में चबूतरे, शेड, शौचालय, पीने का पानी और जीविका दीदियों के लिए तीन पक्की दुकानें होंगी। कूड़ा हटाने की सुविधा भी उपलब्ध होगी।
बड़ी कैटेगरी: बड़े बाजारों में 13 से 16 चबूतरे, कार्यालय, मल्टीपर्पस स्टोर और छह पक्की दुकानें जीविका दीदियों के लिए होंगी।
सरकार का उद्देश्य केवल बिक्री की सुविधा नहीं, बल्कि साफ-सफाई और प्रशासनिक ढांचे को भी मजबूत करना है।
ई-नाम से जुड़ाव, ऑनलाइन बिक्री का अवसर
इन हाटों और बाजारों को ई-नाम योजना से जोड़ने की योजना है। इसका मतलब यह है कि किसान अब अपने उत्पादों को ऑनलाइन नेशनल मार्केट में भी बेच सकेंगे। इससे ग्रामीण उत्पादकों को बिचौलियों से मुक्ति मिलेगी और उन्हें बेहतर दाम मिलेंगे।
संचालन और निगरानी, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती
बाजारों के निर्माण के बाद इनके संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी संबंधित विभागों को दी जाएगी। निगरानी जिला स्तर पर डीएम की अध्यक्षता वाली विशेष कमेटी करेगी, जिसमें इंजीनियर और प्रशासनिक अधिकारी शामिल होंगे। ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने बताया कि इन बाजारों से ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। छोटे किसान और हस्तशिल्पकार अपने उत्पाद लोकल स्तर पर ही बड़े और आधुनिक मंच पर बेच सकेंगे।

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