बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने सभी जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (DIET) के प्राचार्यों और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को इसके लिए आवश्यक निर्देश जारी किए हैं। इस नई पहल से उत्तर प्रदेश में शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होने की उम्मीद जताई जा रही है, जिससे बच्चों का भविष्य और मजबूत होगा।
सुरक्षित और सकारात्मक माहौल पर जोर
नई व्यवस्था के तहत विद्यालयों में बच्चों के लिए एक सुरक्षित, सहज और सकारात्मक वातावरण तैयार किया जाएगा, ताकि वे बिना किसी डर के शिक्षा ग्रहण कर सकें। सीखने की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी और रोचक बनाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
शिक्षण प्रक्रिया में बदलाव
शिक्षकों को नियमित रूप से अभ्यास कार्य देने और उसका मूल्यांकन करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही छात्रों को सुधार के लिए उपयोगी सुझाव भी प्रदान किए जाएंगे, जिससे उनकी सीखने की गति में सुधार हो सके।
आधुनिक मूल्यांकन तकनीकों का उपयोग
बच्चों की समझ और सीखने के स्तर को परखने के लिए नई तकनीकों को अपनाया जाएगा, जिनमें प्रश्नोत्तरी, गतिविधि आधारित मूल्यांकन और थम्ब्स-अप व थम्ब्स-डाउन जैसी सरल विधियां शामिल हैं। इससे बच्चों की वास्तविक प्रगति का आकलन आसान होगा।
कमजोर छात्रों पर विशेष ध्यान
जो छात्र पढ़ाई में पीछे रह गए हैं, उनके लिए विशेष शिक्षण कार्यक्रम चलाए जाएंगे। इससे उन्हें मुख्यधारा में लाने में मदद मिलेगी और उनकी बुनियादी समझ को मजबूत किया जाएगा।
पढ़ने और लिखने की क्षमता को बढ़ावा
कक्षा स्तर के बच्चों को स्वतंत्र रूप से पढ़ने और लिखने के अधिक अवसर दिए जाएंगे। इसके साथ ही पठन और मौखिक भाषा विकास पर विशेष जोर दिया जाएगा, ताकि बच्चों की सोचने और समझने की क्षमता विकसित हो सके।
रचनात्मक शिक्षण पर फोकस
शिक्षकों को ऐसी पाठ योजनाएं तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं, जिनसे बच्चे लंबे समय तक सीखने की गतिविधियों में सक्रिय बने रहें। बच्चों से “क्यों” और “कैसे” जैसे खुले प्रश्न पूछकर उनकी तार्किक क्षमता को बढ़ाने पर भी जोर दिया जाएगा।
पुस्तकालय और रीडिंग कॉर्नर का उपयोग
विद्यालयों में पुस्तकालय और रीडिंग कॉर्नर का नियमित उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा, जिससे बच्चों में पढ़ने की आदत विकसित हो और स्वतंत्र लेखन को बढ़ावा मिले।
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