इन एआरपी की जिम्मेदारी स्कूलों में पढ़ाई की गुणवत्ता सुधारना, शिक्षकों को सहयोग देना और विद्यार्थियों की शैक्षणिक प्रगति को बेहतर बनाना होगी।
पांच साल की सेवा वाले शिक्षक कर सकेंगे आवेदन
एआरपी पद के लिए ऐसे शिक्षक आवेदन कर सकेंगे, जिन्होंने कम से कम 5 साल की सेवा पूरी कर ली है। इसके अलावा जिन शिक्षकों की सेवानिवृत्ति में कम से कम पांच साल का समय बाकी है, वे भी आवेदन के योग्य होंगे। एआरपी के पद पर चयन शुरुआत में एक साल के लिए किया जाएगा। बाद में काम के प्रदर्शन के आधार पर इसकी अवधि बढ़ाई जा सकती है। हालांकि, जो शिक्षक पहले ही तीन साल तक एआरपी के रूप में काम कर चुके हैं, उन्हें दोबारा आवेदन का मौका नहीं मिलेगा।
परीक्षा और इंटरव्यू से होगा सीधा चयन
एआरपी चयन प्रक्रिया में लिखित परीक्षा और इंटरव्यू शामिल होंगे। उम्मीदवारों का मूल्यांकन कुल 100 अंकों के आधार पर किया जाएगा। लिखित परीक्षा के लिए 70 अंक, साक्षात्कार के लिए 30 अंक, अच्छा प्रदर्शन करने वाले शिक्षकों को एआरपी की जिम्मेदारी दी जाएगी।
हर एआरपी को संभालने होंगे 30 स्कूल
चयनित एआरपी अपने संबंधित ब्लॉक के करीब 30 विद्यालयों में शैक्षणिक गतिविधियों की निगरानी करेंगे। वे स्कूलों का निरीक्षण करेंगे और यह देखेंगे कि पाठ्यक्रम समय पर पूरा हो रहा है या नहीं। इसके अलावा वे शिक्षकों को पढ़ाने के बेहतर तरीकों, योजनाओं के क्रियान्वयन और शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने में सहयोग करेंगे।
हर महीने मिलेगा ₹4500 यात्रा भत्ता
एआरपी और एसआरजी को काम के लिए सरकार की ओर से 4500 रुपये प्रति माह यात्रा भत्ता दिया जाएगा। वहीं डायट मेंटर के लिए 2000 रुपये प्रतिमाह यात्रा भत्ते की व्यवस्था होगी। इसके साथ ही टीएलएम के लिए हर महीने 500 रुपये की सहायता भी दी जाएगी।
जिले स्तर पर बनेगी चयन समिति
एआरपी चयन के लिए हर जिले में पांच सदस्यीय समिति बनाई जाएगी। इसकी अध्यक्षता मुख्य विकास अधिकारी करेंगे। समिति में डायट प्राचार्य, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, वरिष्ठ खंड शिक्षा अधिकारी और जिला समन्वयक (प्रशिक्षण) शामिल होंगे।

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