आपको बता दें की इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल किताबों तक सीमित न रखकर उन्हें प्रयोग और अनुसंधान के जरिए सीखने का अवसर देना है। साथ ही किसानों को भी मिट्टी की गुणवत्ता और सही उर्वरक उपयोग के प्रति जागरूक किया जाएगा।
स्कूलों में छात्र सीखेंगे मिट्टी परीक्षण की तकनीक
कृषि भवन में हुई समीक्षा बैठक में कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने इस योजना को आगे बढ़ाने के निर्देश दिए। इससे पहले राज्य के 160 पीएम श्री और राजकीय विद्यालयों में मिनी मिट्टी जांच प्रयोगशालाएं स्थापित की जा चुकी हैं। अब इस योजना का विस्तार करते हुए नए विद्यालयों को भी इससे जोड़ा जाएगा। इन लैब के जरिए कक्षा 7वीं से 11वीं तक के छात्र-छात्राएं मिट्टी के नमूने लेना, जांच करना और मृदा स्वास्थ्य को समझने जैसी गतिविधियों में हिस्सा ले सकेंगे।
केंद्र और राज्य सरकार मिलकर उठाएंगी खर्च
एक विद्यालय में प्रयोगशाला स्थापित करने के लिए करीब 1 लाख रुपये की लागत तय की गई है। इसमें खर्च का 60 प्रतिशत हिस्सा केंद्र सरकार और 40 प्रतिशत राशि राज्य सरकार द्वारा दी जाएगी। इससे स्कूलों में कृषि शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा और विद्यार्थियों में तकनीकी समझ विकसित होगी।
किसानों को भी मिलेगा फायदा
इस योजना का लाभ सिर्फ छात्रों तक सीमित नहीं रहेगा। स्कूलों के माध्यम से किसानों को भी मिट्टी की स्थिति की जानकारी दी जाएगी। योजना के तहत प्रत्येक विद्यालय को मिट्टी के नमूने एकत्र करने, जांच करने और किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड उपलब्ध कराने का लक्ष्य दिया गया है। इससे किसानों को फसल के अनुसार खाद और उर्वरक का सही इस्तेमाल करने में मदद मिलेगी।
छात्रों में बढ़ेगी वैज्ञानिक सोच
सरकार की इस पहल से विद्यार्थियों में वैज्ञानिक नजरिया, तकनीकी कौशल और प्रयोग करने की क्षमता विकसित होने की उम्मीद है। इससे बच्चे कृषि और पर्यावरण से जुड़े विषयों को बेहतर तरीके से समझ पाएंगे।
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