इस पहल के तहत बिहार सरकार अपनी ओर से भी ब्याज में अतिरिक्त राहत देगी। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए सरकार ने इस योजना के लिए 5 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। योजना को लागू करने की जिम्मेदारी नाबार्ड को राज्य एजेंसी के तौर पर दी गई है।
3 लाख रुपये तक के ऋण पर मिलेगा लाभ
योजना का फायदा तीन लाख रुपये तक के फसल ऋण, किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) और अल्पावधि कृषि उत्पादन ऋण पर मिल सकेगा। यदि किसी किसान ने तीन लाख रुपये से अधिक का कर्ज लिया है, तो ब्याज अनुदान की गणना अधिकतम तीन लाख रुपये की राशि तक ही की जाएगी। इस व्यवस्था का उद्देश्य किसानों को साहूकारों या महंगे कर्ज पर निर्भर होने के बजाय बैंकिंग व्यवस्था से आसानी से कृषि ऋण लेने के लिए प्रोत्साहित करना है।
समय पर कर्ज चुकाने वालों को फायदा
इस योजना का लाभ उन्हीं पात्र किसानों को मिलेगा, जो निर्धारित समय के भीतर अपना ऋण चुका देंगे। समय पर भुगतान करने वाले किसानों को ब्याज में मिलने वाली राहत का सीधा फायदा मिलेगा। इससे किसानों को कम लागत पर खेती के लिए पूंजी उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
खेती की लागत घटाने में मिलेगी मदद
कम ब्याज पर ऋण मिलने से किसान बीज, खाद, सिंचाई, कीटनाशक और अन्य कृषि जरूरतों पर समय रहते खर्च कर सकेंगे। इससे खेती के काम में पैसों की कमी के कारण आने वाली परेशानियां कम हो सकती हैं। सरकार का मानना है कि सस्ता संस्थागत कृषि ऋण मिलने से किसानों की उत्पादन क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी। साथ ही खेती से जुड़ी आर्थिक गतिविधियों को मजबूती मिलने और किसानों की आय को बेहतर करने में भी इसका सकारात्मक असर पड़ सकता है।
बैंकों के जरिए मिलेगा कृषि ऋण
इस योजना के दायरे में वाणिज्यिक बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक और सहकारी बैंक से लिए गए पात्र कृषि ऋण शामिल होंगे। यानी किसानों को योजना का लाभ बैंकिंग चैनल के माध्यम से मिलेगा। राज्य सरकार का यह कदम कृषि ऋण को किसानों के लिए अधिक किफायती बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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