यूपी में चकबंदी में बड़ा बदलाव, जमीन मालिकों के लिए खुशखबरी!

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में चकबंदी प्रक्रिया के दौरान किसानों और जमीन मालिकों के हितों को ध्यान में रखते हुए नई व्यवस्था लागू की गई है। चकबंदी आयुक्त डॉ. हृषिकेश भास्कर यशोद ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि सार्वजनिक उपयोग के नाम पर किसानों की जमीन में अनावश्यक कटौती न की जाए। इससे चकबंदी के दौरान जमीन को लेकर होने वाली परेशानियों में कमी आने की उम्मीद है।

3 फीसदी से ज्यादा जमीन काटने पर लेनी होगी मंजूरी

नई व्यवस्था के तहत किसी गांव में सार्वजनिक प्रयोजन के लिए तीन प्रतिशत से अधिक भूमि की कटौती करनी हो तो पहले चकबंदी आयुक्त की अनुमति लेना जरूरी होगा। बिना मंजूरी के अतिरिक्त भूमि लेने पर संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई की जा सकती है। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि विकास कार्यों या सार्वजनिक उपयोग के नाम पर किसानों की जरूरत से ज्यादा जमीन न ली जाए।

विशेष परिस्थिति में ही बदलेगी चकबंदी योजना

चकबंदी योजना में बदलाव या उसके प्रत्यावर्तन को लेकर भी सख्ती की गई है। अब ऐसी प्रक्रिया केवल अपरिहार्य परिस्थितियों में ही अपनाई जाएगी। इसके लिए जिलाधिकारी की संस्तुति के साथ प्रस्ताव चकबंदी आयुक्त के पास भेजना होगा। आयुक्त की पूर्व अनुमति मिलने के बाद ही योजना में बदलाव से जुड़ा आदेश जारी किया जा सकेगा।

किसानों की जमीन पर रहेगी विशेष नजर

अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि चकबंदी की पूरी प्रक्रिया में कृषकों के हितों का ध्यान रखा जाए। सार्वजनिक कार्यों के लिए जमीन की आवश्यकता होने पर भी सामान्य स्थिति में तीन प्रतिशत से ज्यादा भूमि की कटौती नहीं की जाएगी। अगर किसी गांव में इससे अधिक जमीन लेना जरूरी हो, तो उसका कारण स्पष्ट करते हुए प्रस्ताव भेजना होगा।

लापरवाही पर होगी कार्रवाई

सरकार ने चकबंदी अधिकारियों को निर्देशों का सख्ती से पालन करने को कहा है। नियमों की अनदेखी, बिना अनुमति जमीन में अतिरिक्त कटौती या अनावश्यक रूप से प्रक्रिया में बदलाव पाए जाने पर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

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