जिलाधिकारी की मंजूरी के बाद ही होगा स्थानांतरण
नई व्यवस्था के तहत ग्रामसभा की विवादित भूमि के किसी मामले को दूसरे जिले में सुनवाई के लिए भेजने से पहले जिलाधिकारी की पूर्व स्वीकृति जरूरी होगी। बिना अनुमति ऐसा करने वाले चकबंदी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
समीक्षा में सामने आई अनियमितता
चकबंदी आयुक्त की ओर से हाल में ग्रामसभा की विवादित जमीन से जुड़े लंबित मामलों की समीक्षा की गई थी। इस दौरान ऐसे मामले सामने आए, जिनमें विवादित भूमि की सुनवाई दूसरे जिलों में स्थानांतरित किए जाने की शिकायतें थीं। इसके बाद मामलों के स्थानांतरण की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए यह निर्देश जारी किया गया।
ग्रामसभा की जमीन के आदेश पर भी नियंत्रण
निर्देश के अनुसार ग्रामसभा की विवादित भूमि से संबंधित आदेशों को लागू करने से पहले जिलाधिकारी की अनुमति की प्रक्रिया का पालन करना होगा। सरकार का उद्देश्य ग्रामसभा की जमीन से जुड़े मामलों में मनमानी और अनियमितता पर रोक लगाना है।
जमीन खुर्द-बुर्द करने पर FIR के निर्देश
चकबंदी आयुक्त ने यह भी कहा है कि यदि ग्रामसभा की भूमि को अवैध तरीके से खुर्द-बुर्द करने या नुकसान पहुंचाने का मामला सामने आता है, तो संबंधित आरोपितों के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज कराई जाए। नई व्यवस्था से ग्रामसभा की जमीन की सुरक्षा और विवादित मामलों की सुनवाई में जवाबदेही बढ़ने की उम्मीद है।

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