2031 तक लागू रहेगी संशोधित योजना
संशोधित व्यवस्था वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक लागू रहेगी। विद्यार्थियों को 2 लाख रुपये तक के ऋण के लिए बिहार राज्य शिक्षा वित्त निगम के ऑनलाइन माध्यम से आवेदन करना होगा। आवेदन की जांच और दस्तावेजों के सत्यापन के बाद जिला निबंधन एवं परामर्श केंद्र के जरिए आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
2 लाख से ज्यादा ऋण के लिए नया विकल्प
पहले इस योजना के तहत अधिकतम 4 लाख रुपये तक का शिक्षा ऋण मिलता था। अब सीमा घटाकर 2 लाख रुपये कर दी गई है। अगर किसी विद्यार्थी को इससे अधिक राशि की जरूरत है, तो वह पीएम-विद्यालक्ष्मी पोर्टल के जरिए अतिरिक्त शिक्षा ऋण के लिए आवेदन कर सकता है। जिला निबंधन एवं परामर्श केंद्रों पर छात्रों को इस प्रक्रिया में मुफ्त सहायता भी उपलब्ध कराई जाएगी।
समय पर भुगतान करने पर ब्याज में राहत
नई व्यवस्था में समय पर ऋण चुकाने वाले विद्यार्थियों को ब्याज पर प्रोत्साहन दिया जाएगा। पात्र छात्रों को 30 प्रतिशत तक ब्याज प्रोत्साहन मिलेगा। वहीं छात्राओं, दिव्यांग और मंगलामुखी लाभार्थियों को निर्धारित समय में भुगतान करने पर अतिरिक्त 10 प्रतिशत प्रोत्साहन यानी कुल 40 प्रतिशत तक ब्याज प्रोत्साहन मिल सकता है।
अलग-अलग ऋण राशि के लिए तय होगी अवधि
2 लाख रुपये तक के ऋण को अध्ययन और मोरेटोरियम अवधि पूरी होने के बाद अधिकतम तीन साल में चुकाना होगा। वहीं 2 से 4 लाख रुपये तक के ऋण के लिए अधिकतम पांच वर्ष और 4 से 10 लाख रुपये तक की ऋण राशि के लिए अधिकतम 10 वर्ष की पुनर्भुगतान अवधि निर्धारित की गई है।
पुराने आवेदनों पर नहीं पड़ेगा किसी तरह का असर
सरकार ने स्पष्ट किया है कि नए नियम लागू होने से पहले स्वीकृत आवेदनों पर इसका असर नहीं पड़ेगा। ऐसे आवेदनों का निपटारा पुराने नियमों के अनुसार ही किया जाएगा। चालू वित्तीय वर्ष में योजना के लिए 950 करोड़ रुपये खर्च करने की मंजूरी दी गई है।
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