श्रेणी के हिसाब से तय होगा मानदेय
नई व्यवस्था में श्रेणी एक के लिए न्यूनतम मानदेय 40 हजार रुपये, श्रेणी दो के लिए 25 हजार, श्रेणी तीन के लिए 22 हजार और श्रेणी चार के लिए 20 हजार रुपये प्रतिमाह निर्धारित किया गया है। जिन कर्मचारियों को पहले से इससे अधिक भुगतान मिल रहा है, उनके मौजूदा मानदेय को बनाए रखने की बात सामने आई है।
एरियर और दूसरी सुविधाओं पर भी नजर
बढ़ी दर से भुगतान सितंबर से लागू होने की संभावना बताई गई है। ऐसे में पात्रता और सरकारी आदेश के अनुसार एरियर का लाभ भी मिल सकता है। हालांकि भुगतान की अंतिम प्रक्रिया संबंधित आदेश जारी होने के बाद ही स्पष्ट होगी। नई आउटसोर्स व्यवस्था में समय पर मानदेय, ईपीएफ और ईएसआई जैसी सामाजिक सुरक्षा सुविधाओं पर भी जोर दिया गया है। महिलाओं के लिए सवैतनिक मातृत्व अवकाश जैसी सुविधाओं का भी प्रावधान बताया गया है।
10 साल की सेवा पर पेंशन का भी प्रावधान
व्यवस्था में लंबे समय तक सेवा देने वाले कार्मिकों के लिए पेंशन लाभ का भी प्रावधान रखा गया है। रिपोर्ट के अनुसार न्यूनतम 10 वर्ष की सेवा पूरी करने वालों को निर्धारित नियमों के तहत 1,000 से 7,500 रुपये तक पेंशन मिल सकती है।
इस तरह नई व्यवस्था का फोकस केवल मानदेय बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि आउटसोर्स कर्मचारियों के भुगतान और सामाजिक सुरक्षा को अधिक व्यवस्थित करने पर भी है।

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